सुशासन की 'भद्द' पिटी तो डिप्टी CM के विभाग वाले अफसर नप गए, CM नीतीश के विभाग वाले 'भ्रष्ट' अधिकारी कब होंगे निलंबित? परिवहन विभाग ने 1 महीने पहले की थी सिफारिश

सुशासन की 'भद्द' पिटी तो डिप्टी CM के विभाग वाले अफसर नप गए, CM नीतीश के विभाग वाले 'भ्रष्ट' अधिकारी कब होंगे निलंबित? परिवहन विभाग ने 1 महीने पहले की थी सिफारिश

PATNA: बिहार में कहने को सुशासन का राज है। इसी सुशासन राज में अधिकारी बेफिक्र होकर सरकारी खजाने को चूना लगाते हैं। दबाव पर जांच भी होती है लेकिन कार्रवाई वाली फाइल सरकार के नाक नीचे ही दबा दी जाती है। अमूमन हर विभाग की यही स्थिति है। चारो तरफ अराजकता और अफसरों की मनमानी है। भभुआ के एक मामले की पोल मुख्यमंत्री के सामने खुली तो सुशासन पूरी तरह से नंगा हो गया। लाज बचाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश पर डिप्टी सीएम के विभाग के एक भ्रष्ट अफसर को निलंबित किया गया। डिप्टी सीएम के विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी के निलंबन के बाद अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि सीएम नीतीश के विभाग की भी तो वही हालत है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस विभाग का जिम्मा संभाल रहे उस विभाग में एक भ्रष्ट अफसर के निलंबन वाली फाइल एक महीने से पड़ी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद विभागीय मंत्री के अनुमोदन पर परिवहन सचिव ने आरोपी अफसर को निलंबित करने की फाईल सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी थी,पर कोई एक्शन नहीं हुआ।  

डिप्टी CM के विभाग वाले नप गए, CM नीतीश के विभाग के भ्रष्ट अफसर पर एक्शन कब? 

भभुआ नगर परिषद में करोड़ों का घोटाला हुआ था। डीएम की जांच रिपोर्ट में पूरी गड़बड़ी पकड़ी गई थी। जिलाधिकारी ने जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद के नगर विकास विभाग को काफी पहले ही भेज दी थी। लेकिन भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाली वह फाइल सचिवालय में डंप करा दी गई। सोमवार को भभुआ के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री के सामने ही सुशासन की पोल खोल दी। उस शख्स ने मुख्यमंत्री से कहा कि भभुआ नगर परिषद में करोड़ों का घोटाला हुआ। जांच भी हुई लेकिन जांच वाली फाइल सचिवालय में डंप करा दी गई। आप इस मामले में संज्ञान लें. सबके सामने सुशासन के नंगा होने के बाद सीएम नीतीश हरकत में आये। फिर क्या था आरोपी अफसर अनुभूति श्रीवास्तव  को सस्पेंड कर दिया गया। डिप्टी सीएम के विभाग की पोल खुली तो सीएम के आदेश पर आरोपी भभुआ नप के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव सस्पेंड हो गये। वही हाल तो सीएम नीतीश के विभाग का है। उनके विभाग में भी भ्रष्ट अफसर को निलंबित करने वाली फाइल एक महीने से पड़ी है। मुख्यमंत्री जिस सामान्य प्रशासन विभाग का जिम्मा संभाल रहे वो विभाग अब तक उस अधिकारी को निलंबित नहीं किया है। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग में वो फाइल कहां है यह बताने को कोई तैयार नहीं। आपको बता दें कि परिवहन मंत्री के अनुमोदन पर विभाग के सचिव संजय अग्रवाल ने भ्रष्टाचार करने वाले अफसर को निलंबित करने की सिफारिश की थी। भ्रष्ट अधिकारी जिस पर काफी पहले कार्रवाई होनी चाहिए थी वो आज भी जहानाबाद में डीटीओ की नौकरी ठाट से कर रहे। 

CM नीतीश के विभाग का भी वही हाल

परिवहन मंत्री शीला कुमारी ने पटना के तत्कालीन व वर्तमान में जहानाबाद में डीटीओ के पद पर पदस्थापित अजय ठाकुर  को सस्पेंड करने की सिफारिश की. परिवहन मंत्री के अनुमोदन के बाद आरोपी अधिकारी के निलंबन की फाइल 19 जुलाई 2021 को सामान्य प्रशासन विभाग पहुंचा।महीना बीत गया लेकिन दोषी अधिकारी को निलंबित करने वाली सिफारिशी फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मतलब घोटाला उजागर हुए साल भर बीत गये.इतने दिनों तक जांच और कार्रवाई में ही मामला उलझा रहा है। जब परिवहन विभाग ने जांच कर पूरी रिपोर्ट और मंत्री की अनुशंसा के बाद निलंबन करने का पत्र सामान्य प्रशासन विभाग भेज दिया। फिर भी उस अधिकारी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह हाल उस विभाग का है जिसका जिम्मा खुद मुख्यमंत्री संभाल रहे। 

बता दें, सुशासन की सरकार में पिछले साल पटना डीटीओ दफ्तर में करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ था।  न्यूज4नेशन ने 50 करोड़ से अधिक के घोटाले की पोल खोली तो आनन-फानन में 19 सितंबर 2020 को जांच टीम गठित की गई थी। पटना के डीटीओ ऑफिस में करोड़ों के घोटाले का खुलासे के 10 महीने बाद मुख्य साजिशकर्ता बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और वर्तमान में जहानाबाद के डीटीओ अजय कुमार ठाकुर को सस्पेंड करने की सिफारिश की गई.जांच रिपोर्ट आने के बाद मंत्री ने डीटीओ को निलंबित करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की थी। GAD में पत्र 19 जुलाई को गया और आज 20 अगस्त हो गया, लेकिन उस सिफारिश पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।


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