अजूबा गठबंधन! जेडीयू-बीजेपी में एक दर्जन मुद्दों पर भारी मतभेद, फिर भी साथ-साथ भोग रहे 'सत्ता सुख', पढ़ें....

अजूबा गठबंधन!  जेडीयू-बीजेपी में एक दर्जन मुद्दों पर भारी मतभेद, फिर भी साथ-साथ भोग रहे 'सत्ता सुख', पढ़ें....

PATNA:  बिहार में जेडीयू व बीजेपी का गठबंधन लंबे अर्से से है। थोड़े दिनों के लिए दोनों दलों की राहें जुदा हुई थी। पर अलगाव अधिक समय तक नहीं रह पाया. फिर से दोनों दल साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। जेडीयू-बीजेपी का यह गठबंधन भी अजीब है। दोनों दलों के भीतर एक नहीं बल्कि एक दर्जन मुद्दों पर खुलकर मतभेद है। बिहार की सरकार में बड़े भाई की भूमिका में आने के बाद भी भाजपा की नीतियों का नीतीश कुमार की पार्टी खुलकर विरोध करती है। बीजेपी चाहकर भी जेडीयू को सभी मुद्दों पर साध नहीं पा रही। अग्नि पथ योजना के विरोध के बाद फिर से चर्चा शुरू है कि दोनों की दोस्ती अजीब है। दोनों के बीच रिश्ते तल्ख हैं, फिर भी साथ रहकर सरकार चला रहे। आखिर कैसी मजबूरी? भाजपा के अधिकांश नीतियों का विरोध कर नीतीश कुमार उस दल के सहयोग से ही 2005 से अब तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं.  

हंगामा होते रहे और 2 दिनों तक चुप बैठी रही सरकार 

भारत सरकार की अग्नि पथ योजना पर खासकर बिहार में बवाल मचा है। न सिर्फ विपक्षी दल बल्कि एनडीए के घटक दल जेडीयू-हम भी विरोध कर रही है। वैसे हम का बीजेपी के साथ नहीं बल्कि जेडीयू के साथ गठबंधन है। जेडीयू खुलकर केंद्र सरकार की इस नीति का विरोध कर रही है। जेडीयू नेताओं के बयान से आंदोलन कर रहे लोगों को और बल मिल गया कि इस मुद्दे पर नीतीश कुमार की पार्टी केंद्र के साथ नहीं है। उपद्रवियों ने सरकार की मंशा को भांप लिया और फिर जो हुआ वो सबके सामने है। पिछले तीन दिनों से अग्निपथ मामले पर हंगामा जारी है। बीजेपी के सहयोग से चल रही बिहार सरकार इस प्रकरण से अपने आप को अलग रख रही थी। लिहाजा आग की चिंगारी इतनी बढ़ गई कि स्थिति अनकंट्रोल हो गई। भाजपा के बड़े नेताओं के घरों पर हमले होने लगे। डिप्टी सीएम व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के आवास में आगे लगाने की कोशिश की गई। स्थिति हाथ से निकलने के बाद नीतीश सरकार जागी और अब स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। 

अग्निपथ पर बीजेपी के साथ चलने को तैयार नहीं बीजेपी 

आपको बताएं कि कई मुद्दों पर जेडीयू खुलकर भाजपा का विरोध करती है। ताजा मामला अग्नि पथ प्रकरण है। पहले संसदीय बोल्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने इस योजना को गलत बता दिया। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने.जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तो यहां तक कह दिया कि केंद्र सरकार इस योजना पर तुरंत पुनर्विचार करे. ललन सिंह ने 16 जून को ट्वीट कर कहा कि अग्नि पथ योजना के निर्णय से बिहार सहित देश भर के नौजवानों, युवाओं एवं छात्रों के मन में असंतोष, निराशा व अंधकारमय भविष्य (बेरोजगारी) का डर स्पष्ट दिखने लगा है। केंद्र सरकार को इस योजना पर अविलंब पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि यह निर्णय देश की रक्षा व सुरक्षा से भी जुड़ा है।

जातिगत जनगणना कराने की मांग को मोदी सरकार ने किया खारिज 

जेडीयू और बीजेपी के बीच अग्नि पथ योजना के साथ-साथ जाति आधारित जनगणना मुद्दे पर भी तल्खी है। भारत सरकार जातिगत जनगणना कराने की मांग को सिरे से खारिज कर दी है। बीजेपी का मानना है कि देश में सिर्फ अमीरी और गरीबी जाति है। हालांकि पॉलिटिकल दबाव की वजह से भाजपा जनगणना पर सीएम नीतीश के साथ हो पाई है। 

स्पेशल स्टेटेस की जेडीयू की मांग को बीजेपी करती रही है खारिज 

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले इस मुद्दे पर जेडीयू और बीजेपी में भारी मतभेद है। भाजपा का मानना है कि बिहार के विकास के लिए आर्थिक पैकेज दिया गया है। इसी पैकेज के तहत बिहार का विकास किया जा रहा है। स्पेशल स्टेटस के दर्जे की जरूरत नहीं है। वहीं जेडीयू का मानना है कि बिहार विशेष राज्य के दर्जा मिले बिहार का वास्तविक विकास संभव नहीं। सीएए और समान नागरिक संहिता पर भी जेडीयू और बीजेपी में भारी तनातनी है। बीजेपी इसके पक्ष में है। वहीं जेडीयू ने साफ कर दिया है कि इस कानून को बिहार में नहीं लागू होने देंगे। 

लाउडस्पीकर-ज्ञानवापी-इतिहास पर भी भाजपा के साथ नहीं है जेडीयू

हाल ही में यूपी समेत कई अन्य राज्यों में लाउडस्पीकर विवाद सामने आया। इस पर खूब राजनीति हुई। उप्र में मस्जिदों व मंदिरों से प्रशासन ने लाउडस्पीकर उतरवा दिये। वहीं लाउडस्पीकर विवाद पर भी जेडीयू सहयोगी दल के साथ नहीं दिखती । उप्र के  ज्ञानवापी विवाद पर भी नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू भाजपा के साथ खड़ी नहीं है। इतिहास का पुनर्लेखन पर भी सीएम नीतीश कुमार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास को फिर से लिखने की क्या जरूरत है।उसे कोई कैसे बदल सकता है। दरअसल, देश के इतिहास को फिर से लिखे जाने की चर्चा पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी किए जाने के शुरू हुई थी। हालांकि बीजेपी की सहयोगी दल जेडीयू ने इसपर अपना रूख साफ कर दिया है।

जनसंख्या नियंत्रण पर भी सिरफुटौव्ल

जनसंख्या नियंत्रण पर भी दोनों दल साथ नहीं हैं। बिहार बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने कई दफे कहा है कि जातिगत जनगणना कराने से पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है। प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल,गिरिराज सिंह समेत भाजपा के कई बड़े नेता जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग की है. हालांकि नीतीश कुमार का कहना है कि कानून बना देने से जनसंख्या पर नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए महिला शिक्षा की जरूरत है। बिहार में हमलोगों ने इस पर काम किया है। इस वजह से प्रजनन दर में कमी के संकेत मिले हैं। 



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