चार हाथ-पैर की अद्भूत बच्ची, मां-पिता भी दिव्यांग, गरीबी और पैसे के अभाव में नहीं करा पा रहे इलाज, MLA-MP से भी नहीं मिली मदद

चार हाथ-पैर की अद्भूत बच्ची, मां-पिता भी दिव्यांग, गरीबी और पैसे के अभाव में नहीं करा पा रहे इलाज, MLA-MP से भी नहीं मिली मदद

NAWADA : इसे कुदरत का करिश्मा कहें या कुदरत का कहर, एक छोटी बच्ची, जो आम बच्चों से बिल्कुल अलग है। अलग इसलिए क्योंकि उसके दो दो हाथ पैर नहीं, बल्कि चार चार हाथ पैर हैं। विडंबना ऐसी कि दो अतिरिक्त हाथ पैर उसके पैट से बाहर की तरफ लटक रहे है। जो देखने में बहुुत ही विचलित करनेवाला है। शुक्रवार को नवादा जिले के वारिसलीगंज प्रखंड के हेमदा गांव के निवासी माता पिता चार हाथ व चार ही पैर की अद्भूत बच्ची लोगों के लिए कौतूहल का कारण बन गई।

शुक्रवार को सुबह यह दृश्य बना था बिहार के नवादा जिले के कचहरी रोड में। मां की गोद रही बच्ची के इर्द-गिर्द बड़ी भीड़ जमा थी। पास ही बच्ची के पिता भी खड़े थे। कुछ लोग बच्ची के हाथ में कुछ रुपये बिस्किट-मिठाई खाने के लिए थमा रहे थे। भीड़ में बच्ची व्याकुल हो रही थी। । जहां बच्ची को लिए मां-पिता खड़े थे उसके ठीक सामने अनुमंडल  दंडाधिकारी का दफ्तर भी है। जमा भीड़ उत्सुकतावश पूछताछ कर रही थी। 

बच्ची हीं नहीं पूरा परिवार है दिव्यांग

मां-पिता बता रहे घर में पांच परिवार हैं, जिसमें चार दिव्यांग हैं। पिता बसंत पासवान, मां उषा देवी, गोद में रही बच्ची चहुंमुखी कुमारी के अलावा 11 साल का पुत्र भी दिव्यांग है। इस दंपती को कुल जमा तीन बच्चे हैं। एक पुत्र व दो पुत्री। दोनों स्वयं दिव्यांग हैं, दो बच्चे भी दिव्यांग हैं। जमा भीड़ उत्सुकतावश पूछताछ कर रही थ्री। पिता बसंत पासवान, मां उषा देवी, गोद में रही बच्ची चहुंमुखी कुमारी के अलावा 11 साल का पुत्र भी दिव्यांग है। इस दंपती को कुल जमा तीन बच्चे हैं। एक पुत्र व दो पुत्री। दोनों स्वयं दिव्यांग हैं, दो बच्चे भी दिव्यांग हैं। 

बसंत पासवान कहते हैं, पांच में चार परिवार विकलांग हैं। रोजी-रोटी का संकट है। देखना है प्रशासनिक अमला इस दिव्यांग फैमिली के लिए क्या कुछ कर पाते हैं। वहीं समाजसेवी राजेश कुमार श्री ने इस वीडियो को अपने मोबाइल में कैद कर कर जोर शोर से वायरल किए हैं जिसके बाद राजेश कुमार श्री की भी काफी सराहना किया जा रहा है वीडियो में कहा जाता है कि ना ही एमपी ना ही विधायक किसी ने की मदद नहीं की। वहीं पैसे नहीं होने के कारण अस्पताल ने भी पल्ला झाड़ लिया। अब अपनी गरीबी के साथ छोटी सी बच्ची के लिए मदद का इंतजार करना इनकी मजबूूरी हो गई है। 


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