लोकसभा में आज पेपर लीक संशोधन विधेयक पर होगी वोटिंग, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी देंगे जवाब, हंगामे के आसार
केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम' लागू किया था।
Paper Leak Amendment Bill: संसद के मानसून सत्र का बुधवार को आठवां दिन काफी अहम रहने वाला है। लोकसभा में आज 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' को पारित कराने के लिए सरकार वोटिंग कराएगी। इसके साथ ही विधेयक को राज्यसभा में भी पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर सदन में एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
मंगलवार को इस विधेयक पर लोकसभा में दोपहर 2 बजे से रात 11 बजे तक करीब नौ घंटे चर्चा हुई थी। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना है। वहीं विपक्ष ने सरकार को लगातार नीट पेपर लीक और अन्य भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं को लेकर घेरा। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि जब पेपर लीक की घटनाएं पहले ही हो चुकी हैं तो सरकार अब कानून में संशोधन क्यों ला रही है।
प्रह्लाद जोशी पर भी गरमाई राजनीति
मंगलवार को लोकसभा में नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर भी जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई पर दिए गए जोशी के पुराने बयान का जिक्र करते हुए उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए। हालांकि उनकी टिप्पणी बाद में सदन की कार्यवाही से हटा दी गई। संसद परिसर में राहुल गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय ऐसे व्यक्ति को सौंपा गया है, जिसने बलात्कार के दोषियों की रिहाई का समर्थन किया था। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया।
क्या है मौजूदा कानून?
केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम' लागू किया था। इस कानून के तहत पेपर लीक, परीक्षा में नकल कराने, ओएमआर शीट हासिल करने, फर्जी वेबसाइट बनाने, परीक्षकों को धमकाने और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी को गैर-जमानती अपराध बनाया गया।
मौजूदा कानून में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 3 से 5 वर्ष तक की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं यदि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था या एजेंसी के अधिकारी अपराध में शामिल पाए जाते हैं तो 3 से 10 वर्ष तक की सजा और ₹1 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
आज होने वाली वोटिंग के दौरान सरकार इस कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के अपने प्रस्ताव पर सदन की मंजूरी लेने की कोशिश करेगी। वहीं विपक्ष संशोधन विधेयक पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतर सकता है। ऐसे में लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर काफी गर्म रहने के आसार हैं।