Political News: विधानसभा हार के बाद TMC का दिखा जलवा, 23 में 15 सीटें जीतकर भाजपा-लेफ्ट को धूल चटाया

Political News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए पहली बार राहत और सियासी उम्मीद की खबर सामने आई है।

विधानसभा हार के बाद TMC का का दिखा जलवा- फोटो : social Media

Political News:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए पहली बार राहत और सियासी उम्मीद की खबर सामने आई है। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के चुनाव में टीएमसी समर्थित उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 23 निर्वाचित सीटों में से 15 सीटों पर कब्जा जमा लिया। इस नतीजे ने विधानसभा चुनाव के बाद लगातार दबाव झेल रही पार्टी के खेमे में नई जान फूंक दी है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के चुनाव की प्रक्रिया 9 मार्च से शुरू हुई थी। कुल 23 सीटों के लिए हुए मुकाबले में राजनीतिक दलों से जुड़े उम्मीदवारों के साथ निर्दलीय वकील भी मैदान में थे। चुनावी रण में टीएमसी ने 23 उम्मीदवार उतारे थे, जबकि बीजेपी की ओर से 22 और वाम दलों की तरफ से 12 उम्मीदवारों ने ताल ठोकी। इनके अलावा 18 निर्दलीय वकीलों ने भी चुनाव लड़ा। कुल 75 उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को खासा दिलचस्प बना दिया।नतीजे सामने आने के बाद टीएमसी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। पार्टी ने 23 निर्वाचित सीटों में से 15 सीटों पर जीत दर्ज की। बीजेपी और वाम मोर्चे को तीन-तीन सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस के खाते में दो सीटें आईं।

बार काउंसिल की 23 निर्वाचित सीटों में 18 पुरुष और पांच महिला सीटें शामिल थीं। महिला सीटों पर भी टीएमसी का दबदबा कायम रहा। पार्टी ने पांच में से चार महिला सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बची हुई एक महिला सीट कांग्रेस के खाते में गई।यह चुनाव महज वकीलों के बीच पेशेवर मुकाबला नहीं रहा, बल्कि इसमें सियासी दलों से जुड़े कई बड़े नामों ने भी किस्मत आजमाई। टीएमसी की ओर से पूर्व सांसद शुभाशीष चक्रवर्ती, विधायक अशोक देब और पार्टी से जुड़े कई अन्य अधिवक्ता चुनाव मैदान में उतरे।

ऐसे में बार काउंसिल चुनाव का नतीजा सियासी नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी के लिए यह पहली बड़ी पेशेवर संस्था के चुनाव में स्पष्ट बढ़त है। लिहाजा पार्टी समर्थकों के लिए यह परिणाम एक तरह की सियासी संजीवनी के तौर पर देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी को लगातार राजनीतिक झटकों का सामना करना पड़ा। ऐसे वक्त में बार काउंसिल चुनाव में 15 सीटों की जीत ने पार्टी नेतृत्व को यह संदेश दिया है कि संगठन के कुछ हिस्सों में अब भी पकड़ बरकरार है। खासकर अधिवक्ता समुदाय से जुड़े इस चुनाव में बड़ी जीत को पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला नतीजा माना जा रहा है।

हालांकि बार काउंसिल चुनाव को सीधे विधानसभा या लोकसभा चुनाव के जनादेश से जोड़ना उचित नहीं होगा, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह नतीजा टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण है। विधानसभा हार के बाद पहली बार किसी राज्य स्तरीय पेशेवर चुनाव में पार्टी ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर स्पष्ट बढ़त बनाई है।अब सवाल यही है कि क्या यह जीत टीएमसी के सियासी कुनबे में नई ऊर्जा भर पाएगी और पार्टी आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए अपने संगठन को फिर से मजबूत कर पाएगी। फिलहाल बार काउंसिल के नतीजों ने बंगाल की सियासत में टीएमसी को एक छोटी मगर अहम राहत जरूर दी है।