भोजपुरी हमारी जननी है, सम्मान नहीं मिला तो पीड़ा स्वाभाविक...अभिनेता अवधेश मिश्रा बोले- आठवीं अनुसूची में शामिल हो भाषा

Bihar News: भोजपुरी भाषा को संवैधानिक पहचान दिलाने और बिहार में भोजपुरी फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।...

"भोजपुरी हमारे तन-मन, रग-रग और कण-कण में बसी है"- फोटो : reporter

Bihar News: भोजपुरी भाषा को संवैधानिक पहचान दिलाने और बिहार में भोजपुरी फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। आरा पहुंचे चर्चित भोजपुरी अभिनेता अवधेश मिश्रा ने बेबाक अंदाज में कहा कि करोड़ों लोगों की जुबान बनने के बावजूद भोजपुरी आज भी अपने हक और सम्मान का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा कि संसद, विधानसभा और विधान परिषद तक भोजपुरी से जुड़े चेहरे पहुंच चुके हैं, लेकिन आज तक भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा सका, जो बेहद अफसोस और चिंता की बात है।

एक निजी कार्यक्रम में बातचीत के दौरान अवधेश मिश्रा ने कहा कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देश ही नहीं, विदेशों में भी करोड़ों लोग भोजपुरी बोलते और समझते हैं, लेकिन इसके बावजूद इस भाषा को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वह हकदार है। उन्होंने कहा कि यह केवल कलाकारों की नहीं, बल्कि भोजपुरी समाज की सामूहिक पीड़ा है।

उन्होंने बिहार सरकार की फिल्म नीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि बिहार से बाहर कई राज्य भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग के लिए कलाकारों और निर्माताओं को अनुदान और सुविधाएं देते हैं, जबकि भोजपुरी की जन्मभूमि बिहार में ऐसी व्यवस्था का अभाव है। यही वजह है कि अधिकांश भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग दूसरे राज्यों में हो रही है, जिससे बिहार के कलाकारों और स्थानीय फिल्म उद्योग को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

बिना किसी कलाकार का नाम लिए अवधेश मिश्रा ने कहा कि भोजपुरी को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए सभी लोगों को एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने कहा कि जब तक भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिलेगा, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा, "भोजपुरी हमारे तन-मन, रग-रग और कण-कण में बसी है। यह सिर्फ एक भाषा नहीं, हमारी जननी और हमारी पहचान है। इसके सम्मान और उत्थान के लिए हम जीवनभर संघर्ष करते रहेंगे।"

अवधेश मिश्रा के इस बयान के बाद एक बार फिर भोजपुरी भाषा को संवैधानिक दर्जा देने और बिहार में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। भोजपुरी प्रेमियों और कलाकारों का मानना है कि यदि सरकार सकारात्मक पहल करे तो भोजपुरी सिनेमा और भाषा दोनों को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।

रिपोर्ट- आशीष कुमार