Bihar News: शॉर्ट सर्किट से भीषण अगलगी, 18 से अधिक घर जलकर राख, लाखों की संपत्ति बर्बाद
Bihar News: दोपहर में अचानक लगी आग की चपेट में आने से 18 से अधिक घर जलकर राख हो गए।...
Bihar News: दोपहर में अचानक लगी आग की चपेट में आने से 18 से अधिक घर जलकर राख हो गए।पश्चिम चंपारण जिले के नौतन अंचल क्षेत्र के गहिरी मुशहरी टोला गांव में बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने भारी तबाही मचा दी। हादसे में घरों में रखे बर्तन, कपड़े, अनाज, नकदी और अन्य जरूरी सामान समेत लाखों रुपये की संपत्ति बर्बाद हो गई। आग की चपेट में आने से एक भैंस बुरी तरह झुलस गई, जबकि कई बकरियों के भी झुलसने की खबर है।
देखते ही देखते पूरी बस्ती में फैल गई आग
जानकारी के मुताबिक, गहिरी मुशहरी टोला में दोपहर के समय बिजली के शॉर्ट सर्किट से एक फूस की झोपड़ी में अचानक आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि देखते ही देखते आसपास के कई घर इसकी चपेट में आ गए। बस्ती में अफरा-तफरी मच गई। अपने घरों को जलता देख ग्रामीण आग बुझाने के लिए जुट गए। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने का प्रयास किया। अग्निशमन दल की टीम भी मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुटी रही।
इस अगलगी में टीमल मांझी, अमित मांझी, भीमल मांझी, विदेशी मांझी, लालदेव मांझी, मनन मांझी, मनोज मांझी, आकाश मांझी, सुधन मांझी, किशोरी मांझी, ध्रुव मांझी, मंजू देवी, सनबतिया देवी, रामबली मांझी, शिव मांझी, हरेंद्र मांझी, संतोष मांझी, मनोहर मांझी और संजय मांझी समेत कई लोगों के घर जलकर राख हो गए। मनन मांझी की भैंस आग में बुरी तरह झुलस गई। घरों में रखा सामान जल जाने से प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।
बेघर परिवारों के लिए राहत की मांग
पंचायत के मुखिया अनुप लाल यादव ने बताया कि अगलगी की घटना की सूचना बीडीओ गिरधारी लाल और थानाध्यक्ष राजीव कुमार को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इस हादसे से एक दर्जन से अधिक दलित परिवार प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों के पास अब रहने के लिए दूसरा ठिकाना भी नहीं बचा है। मुखिया ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।
वहीं, बीडीओ गिरधारी लाल ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है। प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, अगलगी के बाद पीड़ित परिवारों के सामने रहने, खाने और जरूरी सामान की व्यवस्था करने की बड़ी चुनौती है।
रिपोर्ट- आशीष कुमार