Saran Teachers Constituency: सारण शिक्षक सीट पर रमेंद्र राय की हुंकार, बोले- शिक्षक हूं, शिक्षक ही रहूंगा, सम्मान और अधिकार के लिए लड़ूंगा

Saran Teachers Constituency: पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के सभाकक्ष में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी रमेंद्र राय ने अपने चुनावी अभियान और प्राथमिकताओं को सामने रखा...

: सारण शिक्षक सीट पर रमेंद्र राय की हुंकार- फोटो : reporter

Saran Teachers Constituency: पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के सभाकक्ष में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी रमेंद्र राय ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर अपने चुनावी अभियान और प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि वह स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में हैं और यह चुनाव किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि शिक्षकों की सेवा और उनके अधिकारों की आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से लड़ रहे हैं।रमेंद्र राय ने कहा कि वह स्वयं शिक्षक रहे हैं और शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके मुताबिक, सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी पहचान शिक्षक की ही है और आगे भी वह शिक्षक समुदाय के हितों के लिए काम करते रहेंगे। इससे पहले सितंबर में भी उन्होंने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपनी दावेदारी सार्वजनिक की थी और शिक्षकों के सम्मान व समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता बताया था।

‘शिक्षा रोजगार नहीं, राष्ट्र निर्माण का आधार’

प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि उनका संकल्प शिक्षकों का सम्मान, अधिकार, बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। उनका कहना था कि शिक्षा को सिर्फ रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की बुनियाद के तौर पर देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिए बच्चों को विकास की राह पर आगे बढ़ाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उनके अनुसार, शिक्षा मजबूत होगी तो समाज और देश का विकास भी मजबूत होगा।

‘प्रतिनिधि शिक्षक के बीच भी रहे और सदन में भी आवाज उठाए’

रमेंद्र राय ने कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं को ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो सिर्फ चुनाव के समय उनके बीच नजर न आए, बल्कि लगातार शिक्षकों के संपर्क में रहे और उनकी समस्याओं को विधान परिषद में भी मजबूती से उठाए।उन्होंने शिक्षकों की लंबित समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की बात कही। इससे पहले भी वह शिक्षकों के सम्मान, पेंशन, वेतन विसंगतियों और गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कह चुके हैं।

1978 से संगठनात्मक यात्रा का किया जिक्र

रमेंद्र राय ने अपनी संगठनात्मक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1978 में दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय शिशु संगम से उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारियों की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि शिक्षक के रूप में लंबे अनुभव के बाद सेवानिवृत्ति के बावजूद वह शिक्षकों के कल्याण से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं।उन्होंने दोहराया कि उनकी कोशिश बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने तथा शिक्षकों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने की होगी।प्रेस वार्ता के दौरान राजीव कुमार सिंह, पवन कुमार सिंह, फणीश्वर नाथ और विवेक किशोर ओझा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

रिपोर्ट- आशीष कुमार