रामनगर राज दरबार से निकली ऐतिहासिक माता की डोली यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गूंजे माता के जयकारे
नवरात्र के आज सातवें दिन 200 वर्षों से अनवरत चली आ रही परंपरा के तहत रामनगर राज दरबार से माता की डोली यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल हुए...
Bettiah : शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि के अवसर पर पश्चिमी चंपारण के रामनगर से एक बेहद भव्य और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सामने आया है। सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए रामनगर राज दरबार से माता की ऐतिहासिक डोली यात्रा निकाली गई।
रामनगर राज दरबार से कोट बंजरिया देवी स्थान तक की इस आस्था से जुड़ी यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल हुए। करीब पांच किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर गूंजते माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
बेल के रूप में मां दुर्गा के स्वरूप को डोली में विराजमान कर लाया जाता है राज दरबार
रामनगर राज परिवार की यह विशिष्ट परंपरा करीब 200 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। इस परंपरा के तहत, शारदीय नवरात्र की षष्ठी को राज परिवार के पुरोहित कोट बंजरिया स्थित प्रसिद्ध देवी स्थान पहुंचकर माता को राज दरबार आने का पारंपरिक निमंत्रण देते हैं। इसके बाद सप्तमी की सुबह शुभ मुहूर्त में कहारों के साथ डोली को कोट बंजरिया देवी स्थान भेजा जाता है। वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में पवित्र 'बेल' को डोली में विराजमान कर रामनगर राज दरबार के मंदिर में लाया जाता है, जिसके पश्चात राज दरबार में पारंपरिक तरीके से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
पीढ़ियां बदलीं, लेकिन अटूट बनी हुई है रामनगर राज की यह सांस्कृतिक विरासत
आस्था, राज परंपरा और नवरात्र के पावन उत्सव को एक सूत्र में पिरोने वाली यह ऐतिहासिक डोली यात्रा आज भी उसी पूरी निष्ठा, दिव्यता और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। समय के साथ भले ही पीढ़ियां बदल चुकी हैं, लेकिन रामनगर राज की यह सदियों पुरानी धार्मिक विरासत आज भी आम जनमानस की अगाध आस्था और आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बनी हुई है।
आशीष की रिपोर्ट