Bihar Student Success Story: RO रिपेयर करने वाले पापा का पुत्र अभिनव बना JEE का हीरो, घर की तंगदस्ती में भी बेटे ने सपना किया साकार, 99.40 फीसदी हासिल कर बढ़ाया मान

Bihar Student Success Story: सीमित संसाधनों, आर्थिक तंगी और संघर्षों के बीच एक बेटे ने अपनी मेहनत, लगन और जज़्बे के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।...

RO रिपेयर करने वाले पापा का पुत्र अभिनव बना JEE का हीरो- फोटो : reporter

Bihar Student Success Story: बिहार की मिट्टी से निकली एक प्रेरणादायक दास्तान आज हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन गई है। सीमित संसाधनों, आर्थिक तंगी और संघर्षों के बीच एक बेटे ने अपनी मेहनत, लगन और जज़्बे के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड स्थित सोनमा गांव के 17 वर्षीय अभिनव अजय ने JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 791 हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे मिथिलांचल का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

अभिनव की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उनके पिता अजय कुमार गांव-गांव और शहर-शहर घूमकर RO पानी की मशीनों की मरम्मत का काम करते हैं। इसी मेहनत-मजदूरी से परिवार का खर्च चलता है। आमदनी सीमित थी, लेकिन बेटे को पढ़ाने का हौसला कभी कम नहीं हुआ। आर्थिक परेशानियां बार-बार रास्ता रोकती रहीं, मगर पिता ने अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया।

अजय कुमार बताते हैं कि एक बार वे RO मशीन ठीक करने के लिए एक कोचिंग संस्थान पहुंचे थे। वहां पढ़ाई का माहौल देखकर उनके दिल में ख्वाहिश जगी कि उनका बेटा भी यहां पढ़े। लेकिन आर्थिक हालात ऐसे नहीं थे कि वे दाखिले का खर्च उठा पाते। किस्मत ने यहीं करवट ली। संस्थान के निदेशक सुमित चौबे को जब अभिनव की प्रतिभा और परिवार की परिस्थितियों की जानकारी मिली तो उन्होंने आगे बढ़कर उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई।

अभिनव ने भी मिले अवसर को अपनी मेहनत से सोने में बदल दिया। दिन-रात की पढ़ाई, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE Advanced में शानदार सफलता दिलाई। उनका कहना है कि माता-पिता का त्याग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और खुद पर विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा।

इस उपलब्धि में ओमेगा स्टडी सेंटर की भूमिका भी अहम रही। संस्थान ने फीस से लेकर शैक्षणिक सहयोग और परीक्षा से जुड़ी अन्य जरूरतों तक हर स्तर पर अभिनव का साथ दिया। यही वजह है कि आर्थिक अभाव उनकी उड़ान में रुकावट नहीं बन सका।

आज सोनमा गांव से लेकर पूरे दरभंगा और मिथिलांचल में अभिनव की कामयाबी की चर्चा हो रही है। उनकी कहानी उन हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। अभिनव ने साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इरादे मजबूत हों तो 10×10 के कमरे से भी IIT का रास्ता निकाला जा सकता है।

रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर