बिजली के क्षेत्र में बिहार का बड़ा कब्जा! देश के 70 फीसदी प्रीपेड स्मार्ट मीटर बिहार में, 92 लाख मीटरों ने बदली पूरे सूबे की तस्वीर

Bihar Smart Meter: बिजली वितरण के मोर्चे पर बिहार ने ऐसा दांव चला है कि देश के ऊर्जा नक्शे पर उसकी पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। ....

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बिजली के क्षेत्र में बिहार का बड़ा कब्जा! - फोटो : reporter

Bihar Smart Meter:  बिजली वितरण के मोर्चे पर बिहार ने ऐसा दांव चला है कि देश के ऊर्जा नक्शे पर उसकी पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। राज्य में अब तक 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देशभर में स्थापित कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का करीब 70 प्रतिशत है। वहीं प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों को मिलाकर देश में लगे कुल स्मार्ट मीटरों में बिहार की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बताई गई है।

नई दिल्ली में आयोजित 7वें CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन (IECE 2026) में बिहार के ऊर्जा सचिव एवं BSPHCL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने राज्य की बिजली व्यवस्था में आए बदलाव का ब्यौरा रखा। उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल तकनीक ने बिजली वितरण की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

ऊर्जा सचिव के मुताबिक वर्ष 2020 से 2025 के बीच बिहार में बिलिंग दक्षता 75.14 प्रतिशत से बढ़कर 88.46 प्रतिशत हो गई। संग्रहण दक्षता 86 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि AT&C हानियां 35.12 प्रतिशत से घटकर 11.54 प्रतिशत रह गईं। बिजली चोरी में कमी और बकाया राशि के लगभग समाप्त होने से वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हुई है।

स्मार्ट मीटरों से बिहार ने करीब 10 अरब डेटा पॉइंट्स जुटाए हैं। इसी आंकड़ा-जाल के जरिए बिजली खपत का मिजाज समझने, मांग का अनुमान लगाने और आपूर्ति को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। राज्य में करीब 2 लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर मीटर भी लगाए जा चुके हैं, जिससे ट्रांसफॉर्मरों की निगरानी अब रियल टाइम में संभव हो रही है।

बिहार ने Time-of-Day (ToD) टैरिफ व्यवस्था भी लागू की है। इसके साथ IoT आधारित निगरानी, GIS आधारित परिसंपत्ति मैपिंग, डिजिटल एसेट रजिस्टर और CRM प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘सुविधा बिहार पोर्टल’ के जरिए उपभोक्ताओं को 21 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।राज्य में इस वर्ष 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी की गई। शहरी इलाकों में 23-24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22-23 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया गया है। अब सरकार का जोर सिर्फ बिजली पहुंचाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध आपूर्ति पर है।

बिहार 13 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप, रूफटॉप सोलर, कृषि फीडरों के सोलराइजेशन और पीएम-कुसुम योजना के विस्तार पर भी काम कर रहा है। स्मार्ट ग्रिड और डेटा एनालिटिक्स के सहारे वितरण तंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते बोझ के लिए तैयार किया जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दौर में स्मार्ट मीटर, AI आधारित विश्लेषण, IoT निगरानी और डिमांड रिस्पॉन्स बिजली व्यवस्था की नई ताकत बनेंगे। बिहार की 92 लाख स्मार्ट मीटरों वाली छलांग इसी डिजिटल बदलाव की बड़ी मिसाल के तौर पर सामने आई है।