Bihar Bridge: सीएम के उद्घाटन के 20 दिन बाद हीं 13 करोड़ का पुल चढ़ा भ्रष्टाचार का भेट, 20 फीट एप्रोच पथ में आया दरार, सड़क का हिस्सा धंसा
Bihar Bridge: मोतीहारी जिले में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार मजूरहा-हरदिया पुल के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ...
Bihar Bridge: मोतीहारी जिले में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार मजूरहा-हरदिया पुल के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा एक सितंबर को उद्घाटन किए गए इस पुल के एप्रोच पथ में महज 20 दिन के भीतर करीब 20 फीट लंबी दरार दिखाई देने लगी है। इतना ही नहीं, सड़क का एक हिस्सा एक तरफ नीचे धंस गया है। पुल के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई इस तस्वीर ने निर्माण एजेंसी और कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया गया है कि एक सितंबर को बापूधाम महोत्सव के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिले की कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। इसी क्रम में मजूरहा-हरदिया पुल का भी उद्घाटन हुआ था। पुल के चालू होने के बाद जिला मुख्यालय से करीब 10 प्रखंडों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई और लोगों को आवागमन में काफी सहूलियत मिलने लगी।
करीब 72 मीटर लंबे और 7.5 मीटर चौड़े इस पुल को इलाके के लिए अहम संपर्क परियोजना माना गया। दावा था कि पुल के निर्माण से जिन रास्तों पर लोगों को घंटों का सफर करना पड़ता था, वहां अब कम समय में आवागमन संभव होगा। लेकिन उद्घाटन के 20 दिन के भीतर ही एप्रोच पथ में दरार और सड़क के धंसने की तस्वीरें सामने आने के बाद पूरी परियोजना की गुणवत्ता चर्चा में आ गई है।
स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लागत से बने पुल के एप्रोच पथ में इतनी जल्दी दरार कैसे आ गई। क्या निर्माण के दौरान सड़क की बेसिंग, मिट्टी भराई और गुणवत्ता मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था? क्या निर्माण एजेंसी ने काम जल्दबाजी में पूरा किया? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी को देना होगा।
गौरतलब है कि पुल के निर्माण पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। ऐसे में महज कुछ दिनों में एप्रोच पथ के क्षतिग्रस्त होने से सरकारी धन के इस्तेमाल और निर्माण की निगरानी को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, दरार और सड़क धंसने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर हैं। यदि जांच में निर्माण में लापरवाही या निर्धारित मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों पर कार्रवाई का सवाल भी उठेगा। फिलहाल, 13 करोड़ की परियोजना के एप्रोच पथ की यह स्थिति स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार