Bihar Panchayat: 1830 करोड़ का हिसाब दो, वरना घेरा डालो-डेरा डालो, मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग को दी आंदोलन की चेतावनी

Bihar Panchayat: बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग से छठे वित्त आयोग से जुड़ी 1,830 करोड़ रुपये की राशि का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।

Bihar Panchayat: 1830 करोड़ का हिसाब दो, वरना घेरा डालो-डेरा
मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग को दी आंदोलन की चेतावनी- फोटो : AI-generated photo

Bihar Panchayat: बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग से छठे वित्त आयोग से जुड़ी 1,830 करोड़ रुपये की राशि का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। शनिवार को पटना में पंचायत प्रतिनिधियों और प्रखंड अध्यक्षों की बैठक में पंचायतों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन, राशि के उपयोग और विभागीय स्तर पर आ रही कथित परेशानियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।महासंघ के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल को जमीन पर सफल बनाने के लिए पंचायतों को विभागीय सहयोग मिलना जरूरी है। संगठन का आरोप है कि पंचायती राज विभाग के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है। महासंघ ने साफ कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान और राशि के इस्तेमाल का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

बैठक में ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम आयोजित करने की चेतावनी भी दी गई। महासंघ का कहना है कि पंचायतों को मिलने वाली राशि के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि प्रतिनिधियों और आम लोगों को यह जानकारी मिल सके कि विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध धनराशि किस मद में और किस तरह खर्च की गई।महासंघ अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय, पंच-सरपंच संघ अध्यक्ष अमोद कुमार निराला और कार्यकारी अध्यक्ष जयमाला पासवान समेत अन्य प्रतिनिधियों ने पंचायतों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इनमें खराब सोलर लाइट, पंचायत सरकार भवन, कन्या विवाह योजना और पंचायत सचिवों के स्थानांतरण से जुड़े मामले प्रमुख रहे।

महासंघ ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि गांवों में विकास योजनाओं को लागू कराने और लोगों की समस्याओं के समाधान में सीधे भूमिका निभाते हैं। ऐसे में विभागीय स्तर पर अनावश्यक अड़चन से पंचायतों के कामकाज पर असर पड़ता है। संगठन ने मांग की कि संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए और प्रतिनिधियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए।

बिहार सरकार के वित्त विभाग के अनुसार राज्य वित्त आयोग का संवैधानिक दायित्व पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना और पंचायतों के लिए संसाधनों के हस्तांतरण से जुड़े सुझाव देना है।अब महासंघ की मांग और विभाग की ओर से संभावित जवाब पर नजर है। यदि संगठन के मुताबिक मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायत प्रतिनिधियों के आंदोलन का अगला चरण सामने आ सकता है।