मुजफ्फरपुर पुलिस कप्तान की सादगी ने जीता दिल, दिव्यांग से मिलने खुद नीचे आए SSP कांतेश कुमार मिश्रा

मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने पेश की इंसानियत की मिसाल। दफ्तर में काम छोड़, ट्राई-साइकिल पर आए दिव्यांग मुन्ना कुमार से मिलने खुद चलकर नीचे परिसर में पहुंचे। पुलिस कप्तान की इस सादगी को पूरा बिहार सलाम कर रहा है।

दिव्यांग से मिलने खुद नीचे आए SSP कांतेश कुमार मिश्रा - फोटो : Reporter

मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय चेहरा सामने आया है। अपने कार्यालय में सरकारी कामकाज में व्यस्त एसएसपी को जैसे ही सूचना मिली कि कांटी क्षेत्र से एक दिव्यांग व्यक्ति उनसे मिलने पहुंचा है और शारीरिक अक्षमता के कारण ऊपर आने में असमर्थ है, उन्होंने बिना देर किए अपने सारे काम छोड़ दिए। एसएसपी खुद चलकर कार्यालय परिसर में नीचे आए और ट्राई-साइकिल पर बैठे दिव्यांग व्यक्ति से मुलाकात की।


कांटी के दिव्यांग संघ अध्यक्ष पहुंचे थे मिलने

दरअसल, कांटी थाना क्षेत्र के दिव्यांग संघ के प्रखंड अध्यक्ष मुन्ना कुमार, जो दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, अपनी ट्राई-साइकिल से मुजफ्फरपुर एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। वहां तैनात पुलिसकर्मियों को जब मुन्ना ने कप्तान से मिलने की इच्छा जताई, तो इसकी जानकारी तुरंत एसएसपी को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस कप्तान का दिल पसीज गया और वे प्रोटोकॉल से परे हटकर खुद नीचे परिसर में आ गए। उन्हें अपने सामने देख वहां मौजूद लोग और खुद मुन्ना कुमार भी हैरान रह गए।

कार्यों से प्रभावित होकर गुलदस्ता देने पहुंचे थे मुन्ना

जब एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने मुन्ना कुमार से उनके आने का कारण पूछा, तो जो जवाब मिला उसने पुलिस और आम जनता के बीच की दूरियों को कम कर दिया। मुन्ना ने बताया कि जिले में एसएसपी द्वारा किए जा रहे सराहनीय और न्यायप्रिय कार्यों की चर्चा सुनकर वे उनसे बेहद प्रभावित थे। इसी वजह से वे केवल कप्तान को सम्मानित करने और अपनी तरफ से फूलों का गुलदस्ता भेंट करने आए थे। मुन्ना ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतने बड़े अधिकारी से उनकी मुलाकात इतनी आसानी से हो जाएगी।

पुलिस कप्तान की सादगी ने जीता दिल

एसएसपी से मुलाकात के बाद दिव्यांग मुन्ना कुमार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे जिले के पुलिस कप्तान की इस सादगी और संवेदनशीलता के कायल हो गए हैं। मुन्ना ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा नहीं था कि मैं इतने कम समय में जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी से मिल पाऊंगा, लेकिन उन्होंने अपने पद की गरिमा और व्यस्तता को किनारे रखकर एक दिव्यांग को जो सम्मान दिया, उसने मेरा दिल जीत लिया।"

रिपोर्ट - मणिभूषण