Rajgir Malmas Mela: 33 कोटि देवी-देवताओं के वास की मान्यता के साथ राजगीर में मलमास मेले का सीएम सम्राट ने किया शुभारंभ, ब्रह्मकुंड से वैतरणी तक बह रही भक्ति की धारा
Rajgir Malmas Mela: राजगीर की पावन धरती एक बार फिर सनातन आस्था के महासागर में डूब गई है, जहां ब्रह्मकुंड परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।...
Rajgir Malmas Mela: राजगीर की पावन धरती एक बार फिर सनातन आस्था के महासागर में डूब गई है, जहां ब्रह्मकुंड परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज, शंखनाद और हर-हर महादेव के जयघोष ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। विश्वप्रसिद्ध मलमास (पुरुषोत्तम) मेले का भव्य शुभारंभ रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किया गया, जिन्होंने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ ध्वजारोहण और पूजा-अर्चना कर इस ऐतिहासिक आयोजन की शुरुआत की।
कहा जाता है कि यह अधिमास काल केवल एक धार्मिक अवधि नहीं बल्कि सनातन परंपरा का जीवंत अध्याय है, जब मान्यता अनुसार 33 कोटि देवी-देवताओं का वास राजगीर में होता है। इसी आस्था के कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर ब्रह्मकुंड और अन्य पवित्र गर्म जल कुंडों में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
मुख्यमंत्री ने उद्घाटन अवसर पर कहा कि राजगीर का मलमास मेला केवल बिहार की नहीं बल्कि पूरे भारत की आध्यात्मिक पहचान है, जहां परंपरा, संस्कृति और श्रद्धा एक साथ प्रवाहित होती है। राज्य सरकार ने इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर व्यापक व्यवस्था की है, ताकि आस्था के इस महासंगम में किसी को कोई कठिनाई न हो।
पिछले मेले में 2.19 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया था, और इस बार यह संख्या और अधिक होने का अनुमान है। प्रशासन ने 14 अस्थायी आश्रय स्थल, चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय और सस्ती रोटी केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। साथ ही भीड़ नियंत्रण के लिए जिक-जैक बैरिकेडिंग व्यवस्था लागू की गई है।
मेले के दौरान चार शाही स्नान होंगे, जिनमें देशभर के अखाड़ों और मठों से साधु-संत शामिल होंगे। वैतरणी नदी को मोक्षदायिनी माना जाता है, जहां पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां किए गए कर्मकांड से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। राजगीर का पूरा वातावरण इन दिनों भक्ति, आस्था और अध्यात्म के रंग में रंगा हुआ है, जहां हर ओर केवल श्रद्धा और सनातन संस्कृति की अनुगूंज सुनाई दे रही है।
रिपोर्ट- राज पाण्डेय