दीपावली पर मिट्टी के दीयों की भारी मांग: चाइनीज लाइटों से दूर हुए लोग, कुम्हारों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

दीपावली के मौके पर नवादा जिले के कुम्हारों के चेहरे पर भारी खुशी देखने को मिल रही है, कारण है इसबार लोग चाइनीज लाइट की जगह मिट्टी के दीये खरीदने पर ज्यादा जोर दे रहे है। दीये के रिकॉर्ड बिक्री से कुम्हार परिवारों के चेहरे खिल उठे हैं...

नवादा में दीपावली पर मिट्टी के दीयों की भारी मांग- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : दीपों के महापर्व दीपावली के नजदीक आते ही नवादा के बाजारों में खरीदारी की जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। इस बार मिट्टी के पारंपरिक दीयों की रिकॉर्ड बिक्री होने से कुम्हार परिवारों के चेहरे खिल उठे हैं। वर्षों से मिट्टी के दीये बनाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले कारीगरों के लिए यह त्योहारी सीजन आर्थिक राहत और नई उम्मीदें लेकर आया है।


चाइनीज लाइटों को नकार कर स्वदेशी और मिट्टी के दीयों की ओर बढ़ा रुझान

बाजार में रंग-बिरंगे और अलग-अलग आकर्षक डिजाइन वाले मिट्टी के दीये बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि उपभोक्ता इस बार चाइनीज लाइटों और कृत्रिम सजावटी सामान के बजाय स्वदेशी मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लोगों का मानना है कि दीपावली का असली आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व मिट्टी के दीये जलाने में ही निहित है।


परंपरा को सहेजने और स्थानीय कारीगरों को समर्थन देने की मुहीम

खरीदारी करने पहुंचे आम नागरिकों का कहना है कि दीपावली हमारी समृद्ध संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। घरों को मिट्टी के दीयों से रोशन करने से न केवल पर्व की पारंपरिक पहचान जीवंत रहती है, बल्कि स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों की कड़ी मेहनत को भी सीधा प्रोत्साहन मिलता है। वोकल फॉर लोकल के तहत स्वदेशी खरीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।


बिक्री में बढ़ोतरी से कुम्हार परिवारों को मिली बड़ी आर्थिक राहत

दीये बेचने वाले कुम्हारों का कहना है कि इस साल पिछले वर्षों की तुलना में ग्राहकों की काफी अच्छी आवाजाही है और बिक्री में कोई कमी नहीं है। लगातार हो रही खरीदारी से कुम्हार परिवारों की रोजी-रोटी को बड़ा सहारा मिला है और उनका मुनाफा भी बेहतर हुआ है, जिससे उनका त्योहारी उत्साह दोगुना हो गया है।


संस्कृति, परंपरा और स्वदेशी हुनर को सम्मान देती खूबसूरत तस्वीर

नवादा के बाजारों का यह नजारा केवल दीयों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी परंपरा, संस्कृति और स्थानीय कारीगरों के हुनर को सम्मान देने का एक सशक्त संदेश दे रहा है। मिट्टी के दीयों की यह चमक आने वाले लोक महापर्व छठ तक बाजारों में इसी तरह देखने को मिलेगी।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट