झारखंड से भटककर आए हाथियों का नवादा में खूनी तांडव,मचा दिया कोहराम, एक के बाद एक जा रही लोगों की जान
Bihar News: बिहार के नवादा जिले में जंगली हाथियों का कहर अब पूरी तरह बेकाबू होता दिख रहा है। ....
Bihar News: बिहार के नवादा जिले में जंगली हाथियों का कहर अब पूरी तरह बेकाबू होता दिख रहा है। गोविंदपुर थाना क्षेत्र के आजाद नगर मोहल्ले में शनिवार की सुबह जो मंजर सामने आया, उसने पूरे इलाके को दहशत और मातम में डुबो दिया। 60 वर्षीय बुजुर्ग बच्चू राम की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गांवों में फैला हाथियों का आतंक अब जानलेवा रूप ले चुका है। जानकारी के मुताबिक, सुबह-सुबह बच्चू राम अपने घर से बाहर निकले थे। तभी अचानक पीछे से एक जंगली हाथी आ गया। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी ने उन्हें सूंड से उठाकर बेरहमी से जमीन पर पटक दिया और फिर पैरों से कुचल दिया। कुछ ही पलों में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।
यह कोई पहली वारदात नहीं है। नवादा के रजौली और गोविंदपुर इलाके में पिछले कुछ हफ्तों से हाथियों का झुंड लगातार तबाही मचा रहा है। अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई घरों और खेतों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही हाथियों का झुंड गांवों में घुस आता है और जो सामने आता है, उसे कुचल देता है।
स्थानीय लोगों में डर इस कदर है कि लोग अब शाम के बाद घर से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसान और सुबह-सुबह बाहर निकलने वाले बुजुर्ग सबसे ज्यादा खतरे में हैं। माधोपुर समेत कई गांवों में पिछले एक महीने से यह जंगली कहर जारी है। घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सड़क जाम कर वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका आरोप है कि विभाग के पास न तो कोई ठोस रणनीति है और न ही हाथियों को रोकने की क्षमता। सिर्फ कागजी कार्रवाई और औपचारिक शोर-शराबे के अलावा जमीन पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा।
वन विभाग की टीम मौके पर जरूर पहुंचती है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों को भगाने के नाम पर सिर्फ शोरगुल किया जाता है, और कुछ घंटों बाद हाथी फिर लौट आते हैं। यह पूरी स्थिति अब एक गंभीर ‘वन्यजीव-मानव संघर्ष’ में तब्दील हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड से भटककर आए हाथी भोजन और पानी की तलाश में बिहार के गांवों में घुस रहे हैं। जंगलों का सिकुड़ना, प्राकृतिक आवास का खत्म होना और खेतों में आसानी से मिलने वाला अनाज इस समस्या को और बढ़ा रहा है। फिलहाल नवादा के गांवों में डर और असुरक्षा का माहौल है। लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं, लेकिन हाथियों के सामने यह इंतजाम नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार तुरंत स्थायी समाधान निकाले, वरना यह तांडव और कई जिंदगियों को निगल सकता है।
रिपोर्ट- अमन कुमार