Bihar Police: IPS सुनील नायक के पटना स्थित घर आंध्रप्रदेश पुलिस का रेड, हत्या और प्रताड़ना के गंभीर आरोप में कसा शिकंजा, जाएंगें जेल!
आंध्रप्रदेश के विधानसभा डिप्टी स्पीकर जुड़े कथित हत्या प्रयास और हिरासत प्रताड़ना केस में बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक के ठिकाने पर पुलिस ने रेड की है।...
Bihar Police: आंध्र की सियासत में हलचल तेज़ है। मौजूदा विधानसभा डिप्टी स्पीकर के. रघुराम कृष्ण राजू से जुड़े कथित हत्या प्रयास और हिरासत प्रताड़ना केस में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक के ठिकाने पर रेड की है। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2025 के मार्च में प्रकाशम ज़िले के एसपी और जांच अधिकारी ए.आर. दामोदर ने नायक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। उस वक्त नायक आंध्र में प्रतिनियुक्ति पर सीआईडी में डीआईजी के पद पर तैनात थे। इस मामले में गिरफ्तारी तय मानी जा रही है और उनका जेल जाना तय माना जा रहा है।जमानत रद्द होने के बाद इनको गिरफ्तार कर एपी पुलिस की टीम कोर्ट में लेकर जाएगी और फिर ट्रांजिट रिमांड पर इनको अपने साथ लेकर जाएगी
बता दें पिछले साल 2 या 3 मार्च 2025 को IPS सुनील नायक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया था।
मामला साल 2021 का है, जब तत्कालीन सांसद रघुराम कृष्ण राजू को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार के दौर में गिरफ्तार किया गया था। राजू का आरोप है कि हिरासत में उनके साथ बेरहमी हुई, जानलेवा हमला किया गया और उनकी बाईपास सर्जरी की जानकारी होने के बावजूद सीने पर दबाव डाला गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जरूरी दवाएं लेने से रोका गयाजिसे वह सियासी साज़िश करार देते हैं।
जुलाई 2024 में दर्ज एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी, तत्कालीन सीआईडी प्रमुख पी.वी. सुनील कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए। शिकायत में रबर बेल्ट और लाठियों के इस्तेमाल का आरोप भी दर्ज है। बताया जाता है कि गिरफ्तारी के दौरान हैदराबाद से गुंटूर लाने की प्रक्रिया में सुनील नायक की मौजूदगी की भी जांच हो रही है।
नायक 2019 में प्रतिनियुक्ति पर आंध्र गए थे और 2023 में अपने मूल कैडर बिहार लौट आए, जहां वे इस समय डीआईजी (अग्निशमन सेवा) के पद पर तैनात हैं। हालिया कार्रवाई में एक अन्य नेता के. तुलसी बाबू की गिरफ्तारी और हाईकोर्ट द्वारा जमानत खारिज होने से जांच का दायरा और सख़्त होता दिख रहा है।
कानूनी मोर्चे पर अब पूछताछ, मेडिकल रिकॉर्ड, हिरासत की वीडियोग्राफी और कॉल डिटेल्स जैसे सबूतों की कड़ी जांच हो रही है। सियासी गलियारों में इसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है क्या रेड से ‘कस्टडी कांड’ की गुत्थी सुलझेगी, या सियासत का पारा और चढ़ेगा? जांच एजेंसियों की अगली चाल पर सबकी नज़रें टिकी हैं।
रिपोर्ट- कुलदीप भारद्वाज