तेज प्रताप की जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी : अधिवक्ता ने स्वास्थ्य स्थिति का दिया हवाला, पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

नीट परीक्षा प्रदर्शन के दौरान हुए हिंसा मामले में जेल मे बंद बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की जमानत के लिए सोमवार को एसडीजेएम में अर्जी दाखिल की गई है। उनके अधिवक्ता ने स्वास्थ्य का हवाला दिया है, साथ ही पुलिस पर कई आरोप लगाए है....

तेज प्रताप की जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी- फोटो : अनिल कुमार

Patna : बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद उनके अधिवक्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अधिवक्ता निशा सिंह ने गांधी मैदान थाना कांड से जुड़े इस मामले में एसडीजेएम (SDJM) कोर्ट में सोमवार को जमानत याचिका (बेल पिटीशन) दाखिल की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप यादव की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि वे पहले से ही डायबिटीज (शुगर) और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। ऐसे में उन्हें जेल में रखना उनके स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है और उन्हें तुरंत मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाना चाहिए।

                         

बिना एफआईआर के गिरफ्तारी का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

अधिवक्ता ने पुलिस की पूरी कार्रवाई और उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाया। निशा सिंह का दावा है कि जिस समय तेज प्रताप यादव को हिरासत में लिया गया, उस समय तक उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज ही नहीं की गई थी। बिना एफआईआर दर्ज किए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना कानून के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने इसे पुलिस प्रशासन की गंभीर लापरवाही करार दिया है।


हिरासत के समय और राजनीतिक मंशा पर सवाल

बचाव पक्ष की अधिवक्ता ने इस गिरफ्तारी को पूरी तरह से राजनीतिक साजिश और दुर्भावना से प्रेरित बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस ने जानबूझकर शनिवार का दिन गिरफ्तारी के लिए चुना ताकि अगले दिन रविवार होने के कारण अदालत बंद रहे और उन्हें तुरंत कोई कानूनी राहत या जमानत न मिल सके। इसके अलावा, अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के बाद तेज प्रताप को सीधे थाने ले जाने के बजाय दीघा थाना, दानापुर और नौबतपुर थाने घुमाया गया।


दंगा भड़काने की धाराओं पर कड़ी आपत्ति, घटना की रात का दिया ब्यौरा

मामले में लगाई गई दंगा भड़काने और उकसाने जैसी संगीन धाराओं पर अधिवक्ता ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेज प्रताप यादव ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे शांति व्यवस्था भंग हो। घटना के समय वे अपनी गाड़ी से केवल वहां से गुजर रहे थे। मौके पर मौजूद छात्रों के आग्रह करने पर वे कुछ देर के लिए अपनी गाड़ी से नीचे उतरे, राष्ट्रीय ध्वज फहराया और शांतिपूर्वक वहां से चले गए। उन्होंने न तो कोई भड़काऊ भाषण दिया और न ही किसी को उकसाया।


पारिवारिक अनुपस्थिति के दौरान कार्रवाई, कोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद

अधिवक्ता ने यह भी रेखांकित किया कि जब पुलिस ने यह अचानक कार्रवाई की, उस दौरान परिवार के सदस्य भी शहर से बाहर थे। अचानक उत्पन्न परिस्थितियों के कारण कानूनी प्रक्रिया में समय लगा, लेकिन अब अदालत के सामने सभी तथ्य रख दिए गए हैं। बचाव पक्ष को पूरी उम्मीद है कि तेज प्रताप यादव की मेडिकल स्थिति और कानूनी अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए एसडीजेएम कोर्ट से उन्हें जल्द जमानत मिल जाएगी।


अनिल की रिपोर्ट