बांकीपुर उपचुनाव: पीके का धमाकेदार प्रदर्शन, बीजेपी के गढ़ मे सेंध लगाते हुए इतने वोटों से नीरज सिन्हा को दी मात
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बड़ा उलट-फेर हुआ है। बीजेपी का अभेद किला माना जाने वाला बांकीपुर विधान सभा सीट उसके हाथ से निकल गया है। इस सीट पर प्रशांत किशोर ने कब्जा जमा लिया है.....
Patna : बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों में बड़ा उलटफेर हुआ है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा 18953 वोटो से मात देते हुए भाजपा का अभेद किला माने जाने वाली बांकीपुर सीट पर कब्जा कर लिया है। वोटों की गिनती शुरु होने के साथ ही प्रशांत किशोर की लीड लगातार मजबूत होती गई, और अंतिम 31 वे राउंड में उन्होंने 19324 मतों के भारी अंतर से बीजेपी प्रत्याशी को मात दी है।
भाजपा के अभेद्य किले में सेंधमारी
बांकीपुर विधानसभा सीट को पिछले तीन दशकों से भाजपा का अभेद्य किला माना जाता रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इस सीट से लगातार 5 बार विधायक रह चुके हैं। उनके राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा था। हालांकि, शुरुआती राउंड से ही प्रशांत किशोर ने लगातार बढ़त बनाए रखी और भाजपा के इस मजबूत गढ़ को ध्वस्त करते हुए बड़ी चुनावी जीत दर्ज की है।
मुख्य विपक्षी आरजेडी का निराशाजनक प्रदर्शन
इस उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रत्याशी रेखा गुप्ता की स्थिति काफी कमजोर नजर आई। मतगणना के दौरान आरजेडी उम्मीदवार शुरुआती राउंड से ही तीसरे स्थान पर पिछड़ती चली गईं। विश्लेषकों का मानना है कि पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक और अन्य असंतुष्ट मतदाताओं का रुझान प्रशांत किशोर के पक्ष में शिफ्ट हुआ, जिससे विपक्षी वोटों का ध्रुवीकरण जन सुराज के पक्ष में हुआ।
प्रशांत किशोर की रणनीति और मुद्दों पर आधारित अभियान
प्रशांत किशोर की इस जीत के पीछे उनकी जमीन पर की गई सूक्ष्म रणनीति और मुख्य मुद्दों पर केंद्रित प्रचार को माना जा रहा है। जाति और धर्म के पारंपरिक समीकरणों से हटकर उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्थानीय प्रशासनिक सुधारों और बदलाव के मूड को अपना मुख्य हथियार बनाया। इसके साथ ही मोहल्ला बैठकों और आम जनता के साथ सीधे संवाद ने शहरी मतदाताओं के बीच जन सुराज की साख को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
बिहार की भावी राजनीति पर दूरगामी प्रभाव
बांकीपुर उपचुनाव के यह परिणाम बिहार की भावी राजनीति के दृष्टिकोण से काफी निर्णायक माने जा रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में खाता न खोल पाने के बाद जन सुराज के लिए यह पहली बड़ी रणनीतिक सफलता साबित हो रही है। भाजपा के गढ़ में प्रशांत किशोर की यह जीत न केवल सत्ताधारी दल के लिए बड़ा झटका है, बल्कि यह बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक तीसरे मजबूत विकल्प के उदय का संकेत भी देती है।