बांकीपुर में किसका होगा 'राजतिलक? BJP बचाएगी गढ़ या RJD करेगी उलटफेर, PK बनेंगे गेमचेंजर, जानिए 30 जुलाई को मतदान के पहले क्या है जमीनी हाल

बांकीपुर सीट भाजपा के लिए लंबे समय से मजबूत गढ़ रही है। उप चुनाव में यहाँ भाजपा के लिए अपने 30 साल से अभेद दुर्ग को बचाने की चुनौती है, वहीं पीके लिए खुद को साबित करने का मौका तो राजद भी बड़े उलटफेर का दावा कर रही है.

Bankipur Bypoll 2026- फोटो : news4nation

Bankipur Bypoll 2026 : राजधानी की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 28 जुलाई की शाम चुनाव प्रचार थम गया। अब 30 जुलाई को मतदाता मतदान के जरिए यह तय करेंगे कि इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में किसके पक्ष में जनादेश जाता है। यह उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की शहरी राजनीति, एनडीए सरकार की लोकप्रियता और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की चुनावी स्वीकार्यता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।


बांकीपुर सीट भाजपा के लिए लंबे समय से मजबूत गढ़ रही है। पूर्व विधायक और वर्तमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई, जिसके चलते उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने नीरज सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि महागठबंधन की ओर से राजद ने रेखा कुमारी उर्फ रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। वहीं जन सुराज ने अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाकर इस चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। यह प्रशांत किशोर का पहला प्रत्यक्ष चुनाव भी है।


इन प्रमुख मुद्दों पर रहा प्रचार 

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था, मेट्रो, सड़क और शहरी बुनियादी ढांचे को प्रमुख मुद्दा बनाया। दूसरी ओर राजद ने महंगाई, बेरोजगारी, नगर निगम की व्यवस्था, जलजमाव और स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार पर हमला बोला। जन सुराज ने भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यवस्था परिवर्तन को अपना मुख्य एजेंडा बनाया तथा खुद को भाजपा और राजद दोनों का विकल्प बताने की कोशिश की।


विकास और सुशासन पर भाजपा को भरोसा 

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में NEET पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन भी प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरे। विपक्ष ने इसे युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए सरकार को घेरा, जबकि जन सुराज ने भी इसे अपने अभियान में प्रमुखता से उठाया। भाजपा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए विकास और सुशासन को चुनाव का मुख्य आधार बनाए रखा।


जाति की अहमियत 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर का चुनाव केवल जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं है, क्योंकि यह पटना का प्रमुख शहरी क्षेत्र है। फिर भी कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत, यादव, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। परंपरागत रूप से सवर्ण और व्यापारी वर्ग भाजपा का मजबूत आधार रहे हैं, जबकि राजद मुस्लिम-यादव समीकरण के साथ अन्य वर्गों में समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं जन सुराज की नजर शिक्षित मध्यम वर्ग, युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं पर है।


पीके की परीक्षा 

विश्लेषकों के अनुसार इस उपचुनाव में मतदान प्रतिशत, शहरी मतदाताओं की भागीदारी, युवा वोटरों का रुझान और जन सुराज का प्रदर्शन सबसे अहम कारक साबित हो सकते हैं। खासकर यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर भाजपा और राजद के पारंपरिक वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाते हैं। यही कारण है कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है।