Bihar Gram Kachahari: स्वतंत्रता दिवस पर ग्राम कचहरी सचिव और ग्राम कचहरी न्याय मित्रों की बल्ले-बल्ले, चार माह का एकमुश्त मिलेगा वेतन, ऐसे खाते में पहुंचेगी रकम

Bihar Gram Kachahari: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिहार के ग्राम कचहरी सचिवों और न्यायमित्रों के लिए सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है।...

ग्राम कचहरी सचिव और ग्राम कचहरी न्याय मित्रों की बल्ले-बल्ले- फोटो : reporter

 Bihar Gram Kachahari: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बिहार के ग्राम कचहरी सचिवों और न्यायमित्रों के लिए सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है। पंचायती राज विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई 2026 तक चार महीने के मानदेय और फीस के भुगतान के लिए 51 करोड़ 51 लाख 36 हजार रुपये की राशि मंजूर की है। सरकार के इस फैसले से ग्रामीण न्याय व्यवस्था की बुनियाद संभालने वाले हजारों कर्मियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।पंचायती राज विभाग की ओर से जारी स्वीकृति के मुताबिक ग्राम कचहरी सचिवों के नियत मानदेय के लिए 28 करोड़ 97 लाख 64 हजार रुपये, जबकि ग्राम कचहरी न्यायमित्रों की फीस के लिए 22 करोड़ 53 लाख 72 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। दोनों मदों को मिलाकर कुल रकम 51.51 करोड़ रुपये है।

सचिवों का मानदेय 9 हजार, न्यायमित्रों को 7 हजार रुपये

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत प्रत्येक ग्राम कचहरी में सचिव की नियुक्ति का प्रावधान है। बिहार ग्राम कचहरी सचिव नियमावली के मुताबिक सचिवों को नियत मानदेय दिया जाता है। पंचायती राज विभाग की 4 सितंबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार 1 जुलाई 2025 से ग्राम कचहरी सचिवों का मानदेय 9 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित है।वहीं ग्राम कचहरी की न्यायपीठ को कानूनी सहायता देने के लिए न्यायमित्रों की नियुक्ति का प्रावधान है। नियमावली के तहत वर्ष 2015-16 से न्यायमित्रों को 7 हजार रुपये प्रतिमाह फीस देय है।चार महीने की अवधि के हिसाब से सचिवों और न्यायमित्रों के भुगतान की यह मंजूरी ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले इन कर्मियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। खासकर जिन कर्मियों का भुगतान लंबित था, उनके बकाये का निपटारा भी निर्धारित नियमों के तहत किया जा सकेगा।

सीएफएमएस से सीधे खाते में पहुंचेगी रकम

सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया को भी स्पष्ट कर दिया है। स्वीकृत राशि की निकासी और व्ययन पदाधिकारी संबंधित जिले के जिला पंचायत राज पदाधिकारी होंगे। वे संबंधित संविदा कर्मियों की उपस्थिति विवरणी के आधार पर राशि को सीएफएमएस के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित करेंगे।पूर्व के बकाये का भुगतान भी नियमानुसार सीएफएमएस के जरिए किया जा सकेगा। यानी भुगतान प्रक्रिया को डिजिटल और निर्धारित वित्तीय नियमों के तहत रखने की कोशिश की गई है।राशि की निकासी संबंधित जिलों के जिला कोषागार से बिहार कोषागार संहिता, 2011 के प्रावधानों के अनुसार होगी। विभाग की ओर से इसके लिए अलग से आवंटन आदेश जारी किया जाएगा।

उपयोगिता प्रमाण पत्र देना होगा अनिवार्य

सरकार ने राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती बरती है। जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को अपने जिले की ग्राम कचहरियों के लिए स्वीकृत और आवंटित राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र 18 महीने के भीतर पंचायती राज विभाग को उपलब्ध कराना होगा।सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत रकम से सचिवों और न्यायमित्रों के पुराने बकाये मानदेय या फीस का भुगतान भी नियमों के मुताबिक किया जा सकता है।

यह राशि स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के तहत संबंधित बजटीय मद से खर्च की जाएगी। स्वीकृति आदेश के लिए वित्त विभाग, आंतरिक वित्तीय सलाहकार, पंचायती राज विभाग के सचिव और विभागीय मंत्री की सहमति एवं अनुमोदन प्राप्त किया गया है।

ग्रामीण न्याय की चौखट होगी और मजबूत

ग्राम कचहरी ग्रामीण इलाकों में स्थानीय स्तर पर न्याय और विवाद निपटारे की अहम कड़ी है। ऐसे में सचिव और न्यायमित्र इस व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित मानदेय और फीस मिलने से उनके काम में निरंतरता आने की उम्मीद है।सरकार के इस फैसले को ग्रामीण न्याय व्यवस्था की मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है। समय पर भुगतान होने से कर्मियों की आर्थिक परेशानियां कम होंगी और ग्राम कचहरियों के कामकाज में भी रफ्तार आने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 51.51 करोड़ रुपये की यह मंजूरी ग्राम कचहरी सचिवों और न्यायमित्रों के लिए बड़ी राहत है। चार महीने की राशि एक साथ स्वीकृत किए जाने से जहां लंबित भुगतान का रास्ता साफ होगा, वहीं ग्रामीण स्तर पर न्याय की इस व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। सरकार का जोर अब सिर्फ राशि जारी करने पर नहीं, बल्कि उसके पारदर्शी इस्तेमाल और समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कराने पर भी है।

रिपोर्ट- रंजीत कुमार