Bihar Health Department: बिहार में डॉक्टरों की मनमानी पर स्वास्थ्य विभाग का हंटर, स्पैरो पर बनेगा ऑनलाइन रिपोर्ट कार्ड, सुस्ती दिखाई तो न प्रमोशन मिलेगा, न मनचाही पोस्टिंग!पढ़ लें नया नियम

Bihar Health Department: बिहार के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अपनी मर्जी से आने-जाने और ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों की अब खैर नहीं है। ...

बिहार में डॉक्टरों की मनमानी पर स्वास्थ्य विभाग का हंटर- फोटो : social Media

Bihar Health Department: बिहार के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अपनी मर्जी से आने-जाने और ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों की अब खैर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों की मनमानी, लेटलतीफी और सुस्ती पर नकेल कसने के लिए एक बड़ा 'डिजिटल हंटर' चलाया है। विभाग ने बिहार स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा शिक्षा और दंत चिकित्सा संवर्ग के सभी डॉक्टरों के लिए साल 2025-26 का ऑनलाइन परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट यानी 'ई-पार' (e-PAR) अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए केंद्र सरकार के 'स्पैरो' (SPARROW) सिस्टम को सूबे में लागू किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, अधीक्षकों, सिविल सर्जनों और क्षेत्रीय निदेशकों को अल्टीमेटम जारी करते हुए 7 दिनों के भीतर सभी डॉक्टरों की प्रोफाइल और वांछित डेटा मुख्यालय भेजने का सख्त हुक्म दिया है।विभाग ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में डॉक्टरों का डेटा स्पैरो पोर्टल के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही माना जाएगा और संबंधित बड़े अफसरों को चिह्नित कर उन पर गाज गिरेगी। सिस्टम में पूरी पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए रिपोर्टिंग और रिव्यूइंग अथॉरिटी का पदानुक्रम  तय कर दिया गया है। साधारण व विशेषज्ञ डॉक्टर की  रिपोर्ट प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी लिखेंगे, रिव्यू सिविल सर्जन करेंगे और फाइनल मुहर क्षेत्रीय अपर निदेशक लगाएंगे।मेडिकल कॉलेज (प्रोफेसर/ट्यूटर) की  रिपोर्ट विभागाध्यक्ष (HOD) लिखेंगे, रिव्यू प्राचार्य/अधीक्षक करेंगे और फाइनल मुहर निदेशक प्रमुख (प्रशासन) लगाएंगे।निदेशक व शीर्ष पद की रिपोर्ट खुद स्वास्थ्य सचिव लिखेंगे, रिव्यू अपर मुख्य सचिव  करेंगे और अंतिम मंजूरी विभागीय मंत्री के स्तर से होगी।

अब तक डॉक्टरों की सालाना कार्य प्रगति रिपोर्ट  कागजों पर बनती थी, जिसमें जमकर भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगते थे। लेकिन अब 'स्पैरो' सिस्टम के आने से डॉक्टरों की लेटलतीफी, मरीजों के प्रति उनका बर्ताव और अस्पतालों में उनकी सक्रियता का सटीक और लाइव मूल्यांकन हो सकेगा।

 डॉक्टरों को मिलने वाला प्रमोशन, मनचाही पोस्टिंग और अस्पतालों की कप्तानी अब किसी पैरवी से नहीं, बल्कि उनके ऑनलाइन रिपोर्ट कार्ड के दम पर तय होगी। डॉक्टरों को एक हफ्ते के अंदर अपना नाम, पदनाम, मोबाइल, ई-मेल, वर्तमान पोस्टिंग की तारीख के साथ-साथ आकस्मिक और अर्जित अवकाश को छोड़कर ली गई अन्य सभी छुट्टियों का पूरा कच्चा-चिट्ठा ऑनलाइन फॉर्म में भरना होगा। इस डिजिटल चाबुक से अब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद जाग गई है।