साहब ने ली रिश्वत, बनवाए फर्जी प्रमाण पत्र; फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने तोड़ी निलंबन की बेड़ियाँ, डॉ. संजय कुमार की सेवा में वापसी

स्वास्थ्य विभाग ने भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा करने के आरोपी मशरख के तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार को निलंबन से मुक्त कर दिया है। उन पर रिश्वत लेने और फर्जी रिपोर्ट बनाने के आरोप हैं, जिसकी विभागीय जांच जारी रहेगी।

Patna : बिहार के स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार और जालसाजी के गंभीर आरोपों में घिरे मशरख के तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार पर सरकार ने बड़ी मेहरबानी दिखाई है। स्वास्थ्य विभाग ने एक चौंकाने वाले फैसले में डॉ. कुमार को निलंबन मुक्त करते हुए सेवा में वापस लेने की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में उनके विरुद्ध चल रही अनुशासनिक कार्यवाही बदस्तूर जारी रहेगी। 

रिश्वत और फर्जीवाड़े का खेल 

डॉ. संजय कुमार पर लगे आरोप किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने कर्मियों की मिलीभगत से अस्पताल में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और फर्जी जख्म प्रतिवेदन (Inquiry Report) जारी करने का काला धंधा चलाया। इतना ही नहीं, एक व्यक्ति के मनमुताबिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए बिचौलिए के माध्यम से 7,900 रुपये की रिश्वत डकारने का भी उन पर संगीन आरोप है। 

नियमों की जमकर उड़ाई धज्जियां 

डॉक्टर साहब की मनमानी यहीं नहीं रुकी। जांच में पाया गया कि उन्होंने अस्पताल से अनधिकृत रूप से गायब रहने वाले अन्य डॉक्टरों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया। इसके अलावा, दवाओं की स्टॉक पंजी में हेराफेरी करने और लेखापाल की मौजूदगी के बावजूद अवैध तरीके से डाटा एंट्री ऑपरेटर के माध्यम से सरकारी खरीदारी का आदेश देने जैसे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण भी विभाग को मिले थे। 

मुख्यालय में दी गई पनाह 

विभाग द्वारा जारी अधिसूचना सं०-125(9) के अनुसार, डॉ. कुमार को निलंबन की बेड़ियों से आजाद कर दिया गया है। उन्हें फिलहाल 'पदस्थापन की प्रतीक्षा' (Waiting for Posting) में रखा गया है और निर्देश दिया गया है कि वे स्वास्थ्य विभाग के पटना स्थित मुख्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि उनके निलंबन काल के वेतन और अन्य सुविधाओं पर अंतिम निर्णय जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा। 

विभागीय कार्यवाही पर टिकी नजर 

सरकार के अवर सचिव उपेन्द्र राम के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश ने स्वास्थ्य महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। जहां एक तरफ उन्हें सेवा में वापस लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ विभाग का कहना है कि उनके खिलाफ आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अलग से संकल्प निर्गत कर जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। अब देखना यह होगा कि मुख्यालय में बैठे अधिकारी इस 'दागी' डॉक्टर पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर पाते हैं या नहीं।