Bihar Jobs: 9 हजार लोगों को रोजगार, कचरे से कमाई की नई राह, बिहार में रोज 14 टन प्लास्टिक होगा रिसाइकिल

Bihar Jobs: प्लास्टिक कचरे को अब कचरा नहीं, बल्कि कमाई और रोजगार का जरिया बनाने की तैयारी है।

9 हजार लोगों को रोजगार- फोटो : social Media

Bihar Jobs:  पटना के फतुहा में प्लास्टिक कचरे को अब कचरा नहीं, बल्कि कमाई और रोजगार का जरिया बनाने की तैयारी है। यहां नई वेस्ट-टू-वेल्थ रीसाइकलिंग फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। संयंत्र के शुरू होने के बाद प्रतिदिन करीब 10 से 14 टन प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर कुर्सी, मेज, डाइनिंग टेबल, बेंच, बाल्टी और इंटरलॉकिंग टाइल्स जैसे टिकाऊ उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 9 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि फतुहा में प्लास्टिक से फर्नीचर और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने के लिए फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी।

40 किलो प्लास्टिक से तैयार होगी एक मजबूत बेंच

संयंत्र में सिंगल यूज और कम गुणवत्ता वाले रिजेक्टेड प्लास्टिक को रिसाइकिल कर उपयोगी सामान बनाया जाएगा। एक 20 लीटर की बाल्टी बनाने में करीब 2 से 3 किलो प्लास्टिक की खपत होगी, जबकि एक मजबूत बेंच के निर्माण में कम से कम 40 किलो प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस तरह लंबे समय तक इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में बड़ी मात्रा में नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की खपत होगी।

कबाड़ बीनने वालों को सप्लाई चेन से जोड़ने की तैयारी

परियोजना में कचरा बीनने वालों और कबाड़ कारोबारियों को औपचारिक सप्लाई चेन से जोड़ने की योजना है। उन्हें एकत्र किए गए प्लास्टिक का उचित मूल्य सीधे बैंक खाते में भुगतान किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं डोर-टू-डोर ड्राई वेस्ट कलेक्शन और शुरुआती स्तर पर कचरे की छंटाई की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को देने की योजना है।

सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पंचायत भवनों और पार्कों में कम लागत वाले वाटरप्रूफ और दीमक-रोधी फर्नीचर का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। इससे प्लास्टिक कचरे को लैंडफिल और प्राकृतिक जलस्रोतों तक पहुंचने से रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

चार चरणों में कचरे से तैयार होंगे उत्पाद

सबसे पहले घरों, होटलों और डंपिंग ग्राउंड से प्लास्टिक एकत्र कर उसे ऑटोमेटेड सेंसर और मैनुअल सॉर्टिंग के जरिए एचडीपीई, एलडीपीई और पॉलीप्रोपाइलीन जैसी श्रेणियों में अलग किया जाएगा। इसके बाद प्लास्टिक को छोटे टुकड़ों में काटकर री-सर्कुलेटेड वाटर यूनिट में धोया जाएगा। साफ किए गए टुकड़ों को नियंत्रित तापमान पर पिघलाकर प्लास्टिक पैलेट्स तैयार होंगे। अंतिम चरण में इन्हें डाई और मोल्डिंग मशीनों में उच्च दबाव के साथ ढालकर कुर्सी, बेंच, टेबल और टाइल्स जैसे उत्पाद बनाए जाएंगे।

बिहार में ऐसी फैक्ट्रियां पहले जोन और फिर जिलावार स्थापित करने की योजना है। सीतामढ़ी में फतुहा से पहले ऐसी फैक्ट्री शुरू की जा चुकी है, जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहना की थी। अब फतुहा के बाद अन्य जिलों और जोन में भी इस मॉडल का विस्तार करने की योजना है।