CBI के अधिकार पर उठे सवालों का पटाक्षेप, बिहार पुलिस बोली- सिस्टम में नहीं हुआ कोई बदलाव

Bihar CBI: राज्य सरकार और केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीबीआई को दिए जाने वाले अधिकारों से जुड़ी गृह विभाग की अधिसूचना को लेकर उठे विवाद पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने स्थिति साफ कर दी है। ....

CBI के अधिकार पर उठे सवालों का पटाक्षेप- फोटो : social Media

Bihar CBI: राज्य सरकार और केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीबीआई को दिए जाने वाले अधिकारों से जुड़ी गृह विभाग की अधिसूचना को लेकर उठे विवाद पर बिहार पुलिस मुख्यालय ने स्थिति साफ कर दी है। शनिवार को पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि 3 सितंबर को गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना का मकसद मौजूदा व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव करना नहीं है।

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि नई अधिसूचना इस विषय में पूर्व में जारी सभी अधिसूचनाओं का स्थान लेती है। इसके बावजूद व्यवस्था के मूल स्वरूप में कोई तब्दीली नहीं की गई है। पुलिस मुख्यालय ने मीडिया के एक हिस्से में प्रकाशित उन खबरों को भी भ्रामक और बेबुनियाद करार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि बिहार की BJP सरकार ने सीबीआई को लेकर कोई विरोधी रुख अख्तियार किया है।

विज्ञप्ति में कहा गया कि पूर्व से प्रभावी वैधानिक व्यवस्था में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। वर्ष 2023 में देशभर में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुरूप मौजूदा कानूनी प्रावधानों को अपडेट और प्रभावी बनाए रखने के लिए नई अधिसूचना जारी की गई है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सीबीआई की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को लेकर वैधानिक सहमति का नियमन समय-समय पर किया जाता रहा है। इससे पहले इस संबंध में अधिसूचना वर्ष 1996 में जारी की गई थी। अब नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद कानूनी प्रावधानों को उसी के अनुरूप अपडेट किया गया है।

नई अधिसूचना में BNS, BNSS, नए साक्ष्य कानून के अलावा आईटी एक्ट जैसे आधुनिक कानूनों को भी सहमति के दायरे में शामिल किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने दो टूक कहा कि इसे सीबीआई के खिलाफ किसी नीतिगत फैसले के तौर पर देखना उचित नहीं है।इस तरह पुलिस मुख्यालय ने उठे तमाम सवालों पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया कि अधिसूचना का उद्देश्य कानूनी व्यवस्था को नए कानूनों के अनुरूप अपडेट करना है, न कि सीबीआई की शक्तियों या मौजूदा सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव करना।