Bihar Consumer Commission: आखिरकार 12 साल बाद मिला इंसाफ, डॉक्टर की लापरवाही साबित, आदेश से हड़कंप
Bihar Consumer Commission: चिकित्सा में लापरवाही के करीब 12 साल पुराने मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। ...
Bihar Consumer Commission: चिकित्सा में लापरवाही के करीब 12 साल पुराने मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार और सदस्य मो. शमीम अख्तर की पीठ ने नीरज कुमार जैन की शिकायत पर सुनवाई करते हुए छपरा की महिला चिकित्सक डॉ. बिमला शाही को चिकित्सीय लापरवाही और सेवा में कमी का दोषी ठहराया है।
आयोग ने डॉक्टर को शिकायतकर्ता नीरज कुमार जैन को 60 दिनों के भीतर 20 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके अलावा मुकदमे के खर्च के तौर पर 20 हजार रुपये भी देने होंगे। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर बकाया राशि पर 8 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
मामला वर्ष 2013 का है। 15 जुलाई को नीरज कुमार अपनी पत्नी शालू जैन को गर्भधारण की आशंका के चलते डॉ. बिमला शाही के मेटरनिटी सेंटर लेकर पहुंचे थे। आरोप के मुताबिक, चिकित्सक ने आवश्यक जांच कराए बगैर दवा लिख दी। इसके बाद 9 अगस्त को शालू की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दोबारा डॉक्टर के पास ले जाया गया।
डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड कराया गया, जिसमें करीब 5 सप्ताह 3 दिन का गर्भ होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद दंपती छपरा के ही डॉ. कृष्णानंद के पास पहुंचे। वहां भी बिना जांच दवा दी गई और दो दिन बाद मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
गंभीर हालत में उसी दिन शालू जैन को पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकीय जांच के दौरान पता चला कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।करीब 12 साल बाद आयोग के इस फैसले ने चिकित्सा सेवा में लापरवाही को लेकर एक अहम संदेश दिया है। आयोग के आदेश के बाद अब निर्धारित समय सीमा के भीतर मुआवजा और मुकदमे का खर्च भुगतान करना होगा।