Shambhu Girls Hostel: 13 दिन बाद शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची सीआईडी की टीम, नीट छात्रा के संदेहास्पद मौत मामले में फजीहत के बाद जागा सिस्टम, जांच जारी

Shambhu Girls Hostel: सीआईडी की टीम चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची, जहां हर दीवार, हर कमरा अब सवाल बन चुका है।...

13 दिन बाद शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची सीआईडी की टीम- फोटो : reporter

Shambhu Girls Hostel:पटना के मुन्नाचक इलाके में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल जहां किताबों की सरसराहट और डॉक्टर बनने के ख्वाब पलते हैं आज वहां खामोशी चीख़ बन चुकी है। नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदेहास्पद मौत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सच अब भी फाइलों के जाल में उलझा हुआ है। इसी बीच आज यानी 25 जनवरी को  सीआईडी की टीम चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची, जहां हर दीवार, हर कमरा अब सवाल बन चुका है।

6 जनवरी को छात्रा अपने कमरे में बेहोश मिली थी। हॉस्टल कर्मियों ने न पुलिस को खबर दी, न कमरे को सील किया। तीन दिनों तक उसे एक के बाद एक तीन अस्पतालों में घुमाया गया। शुरुआती मेडिकल काग़ज़ात में नींद की दवा के ओवरडोज़ की थ्योरी गढ़ दी गई कोमा, इलाज और फिर 11 जनवरी को मौत। काग़ज़ों में कहानी “साफ़” थी, मगर ज़मीनी हक़ीक़त में साज़िश की बदबू थी।

शनिवार को आई फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पुलिस की बनाई स्क्रिप्ट को तार-तार कर दिया। रिपोर्ट में छात्रा के शरीर और प्राइवेट पार्ट्स पर चोट के निशान दर्ज पाए गए। यानी मामला सिर्फ़ ओवरडोज़ का नहीं था। 6 से 9 जनवरी तक पुलिस का मौके पर न पहुंचना, न हॉस्टल सील होना, न फॉरेंसिक टीम बुलाना ये सब महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि तफ्तीश का क़त्ल है।

मीडिया में सवालों की बौछार और एफएसएल रिपोर्ट से किरकिरी के बाद पटना पुलिस हरकत में आई। चित्रगुप्तनगर थाना कांड संख्या 14/26 की समीक्षा के बाद दो अधिकारियों कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा और चित्रगुप्तनगर थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी को निलंबित कर दिया गया। मगर सवाल वहीं के वहीं हैं: क्या ये सिर्फ़ बलि का बकरा हैं?

इधर, एसआईटी द्वारा सौंपे गए अधूरे दस्तावेज़ों ने जांच की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। AIIMS पटना के विशेष मेडिकल बोर्ड के हाथ भी अधूरे सबूतों के चलते बंधे हुए हैं। इसी बीच फॉरेंसिक की बायोलॉजिकल रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी छात्रा के अंडरगारमेंट्स में मेल स्पर्म की पुष्टि हुई। यानी यौन उत्पीड़न की आशंका पर विज्ञान की मुहर लग चुकी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है वह दरिंदा कौन है? और उससे बड़ा गुनाहगार वह कौन-कौन हैं, जिन्होंने सच को दफ़नाने की कोशिश की? शंभू हॉस्टल की खामोशी अब जवाब मांग रही है।

ऱिपोर्ट- अनिल कुमार