चीफ जस्टिस सूर्य कांत 26 सितंबर को आएंगे पटना, देश के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का करेंगे उद्घाटन

यह बिहार राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की एक पायलट परियोजना है, जिसे कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत स्थापित किया गया है। ​अपराध से पीड़ित व्यक्ति या उसका परिवार शायद ही कभी न्याय प्रणाली का सामना करने के लिए पहले से तैयार होता

CJI Surya Kant in Patna- फोटो : news4nation

Bihar News : भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत,  26 सितंबर, 2026 को पटना स्थित बिहार राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण में देश के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर एक 'ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन' का शुभारंभ किया जाएगा। मल्टी-यूटिलिटी वाहनों के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा और चीफ जस्टिस केंद्र पर प्राधिकरण के आधिकारिक प्रकाशन का विमोचन करेंगे। यह केंद्र देश में अपनी तरह का पहला केंद्र है। 


यह बिहार राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की एक पायलट परियोजना है, जिसे कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत स्थापित किया गया है।  अपराध से पीड़ित व्यक्ति या उसका परिवार शायद ही कभी न्याय प्रणाली का सामना करने के लिए पहले से तैयार होता है। 


इस स्थिति में पीड़ित परिवार को पुलिस स्टेशन, अस्पताल, अदालत और कई सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। यद्यपि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और बिहार पीड़ित मुआवजा योजना, 2014 के तहत मुफ्त आपातकालीन चिकित्सा, मुफ्त कानूनी सहायता, एफआईआर की प्रति, जमानत के चरण में सुनवाई, मुआवजा, सुरक्षा और अपील का अधिकार जैसे कई अधिकार पहले से प्राप्त हैं, लेकिन अब तक कोई ऐसी संस्था नहीं थी जो पूरी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित के साथ खड़ी रहे।  


वर्तमान में सहायता विभिन्न संस्थाओं (जैसे जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, पुलिस, वन स्टॉप सेंटर, समाज कल्याण विभाग, अस्पताल आदि) में बिखरी हुई है। यह केंद्र उन सभी कमियों को दूर करने के लिए निम्न सुविधाएं प्रदान करेगा। एक एकल प्रवेश द्वार  होगा।पीड़ित को अलग-अलग काउंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।  एकल रिकॉर्ड होगा,जिससे पीड़ित को हर जगह अपनी आपबीती दोहराने की आवश्यकता नहीं होगी।  


साथ ही केंद्र के लिए आंतरिक समय-सीमा तय की गई है और राहत मिलने व सत्यापन होने के बाद ही मामला बंद किया जाएगा। यह केंद्र किसी नए कानून या नए वैधानिक निकाय के बिना, प्राधिकरण के मौजूदा परिसरों और संसाधनों का उपयोग करके काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, निरंतरता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।  


इस परियोजना की परिकल्पना और कार्यान्वयन पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस व प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक जस्टिस वी. कामेश्वर राव तथा पटना हाईकोर्ट व प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस सुधीर सिंह के मार्गदर्शन में किया गया है।  पटना हाईकोर्ट के जस्टिसअजीत कुमार इसके पहले अध्यक्ष हैं। समन्वय समिति विभिन्न संबंधित विभागों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हैं।  


 प्राधिकरण के सदस्य सचिव के पास इसका प्रशासनिक नियंत्रण रहेगा।यह केंद्र देश में पहली बार 'स्थितिजन्य पीड़ितों'  को एक विशिष्ट वर्ग के रूप में मान्यता देता है और उनका रिकॉर्ड रखता है। जब परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति लंबे समय तक विचाराधीन कैदी रहता है, तो परिवार की आय बंद हो जाती है और बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। लंबी हिरासत के बाद बरी होकर लौटने वाले व्यक्ति जिनका आजीविका और सामाजिक जीवन समाप्त हो चुका होता है।  


बिहार में 31 दिसंबर, 2023 तक जेलों में 53,076 बंदी थे (देश में दूसरा सबसे अधिक), जिनमें से 46,000 से अधिक विचाराधीन कैदी थे। यह केंद्र पहले तीन महीनों में पटना के लिए बेसलाइन डेटा संकलित करेगा। भारत के चीफ जस्टिस का पीड़ित अधिकारों के प्रति योगदान पूर्व में भी महत्वपूर्ण रहा है।जगजीत सिंह बनाम आशीष मिश्रा मामले में उन्होंने फैसला दिया था कि पीड़ित को सुने जाने का अधिकार आपराधिक प्रक्रिया के हर चरण (जांच से लेकर जमानत और अपील तक) में शामिल है।  


2014 के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले में उन्होंने जेल बंदियों के वैवाहिक और पारिवारिक दौरों के लिए योजना बनाने हेतु जेल सुधार समिति का गठन करने का आदेश दिया था। यह हेल्पलाइन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास, पहचान पत्र, आवास, रोजगार और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने में सहायता करेगी। इस अवसर पर केंद्र की मानक संचालन प्रक्रिया और योजनाओं पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा, जिसे अधिवक्ता और परियोजना समन्वयक सुश्री शमा सिन्हा द्वारा तैयार किया गया है।