लालू जी का नाम मिटाने के लिए 500 करोड़ की बर्बादी': बिहार निवास ढहाने पर नीतीश सरकार पर तीखा हमला

बिहार निवास को ढहाने के फैसले पर बिहार की सियासत गरमा गई है। नीतीश सरकार पर आरोप लगा है कि वह लालू यादव के नाम का शिलापट्ट हटाने के लिए 500 करोड़ रुपये की भव्य इमारत को बर्बाद कर रही है। इस फैसले को 'कुंठित मानसिकता' का परिणाम बताया है।

Patna -  : दिल्ली स्थित बिहार निवास को ढहाकर नया भवन बनाने के नीतीश सरकार के फैसले ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह केवल पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के नाम का शिलालेख (शिलापट्ट) हटाने के लिए एक मजबूत और भव्य इमारत को जमींदोज कर रही है। इसे 'तुगलकी फरमान' बताते हुए सरकार से पांच बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है।

शिलापट्ट बनाम सियासत: "छाती पर लोटता है सांप" 

आरोपों के मुताबिक, बिहार निवास के पोर्टिको में उद्घाटनकर्ता के रूप में लालू प्रसाद यादव का नाम लिखा है। जब भी सत्ताधीशों की गाड़ियां वहां रुकती हैं, तो उनकी नजर उस नाम पर पड़ती है। आरोप लगाया गया है कि इसी ईर्ष्या के कारण पूरी इमारत को ध्वस्त करने की साजिश रची गई है ताकि अपने चहेते ठेकेदारों की जेबें भरी जा सकें और नीतीश कुमार अपना नाम वहां लिखवा सकें।

सरकारी दलीलों पर खड़े किए 5 बड़े सवाल:

  1. इमारत की मजबूती: वर्ष 1994 में निर्मित यह भवन अभी भी शानदार है और अगले 50-60 साल तक मजबूती से खड़ा रह सकता है। हाल ही में 2 करोड़ रुपये इसके सौंदर्यीकरण पर खर्च हुए हैं, तो इसे क्यों तोड़ा जा रहा है?

  2. कर्ज में डूबा राज्य: बिहार पर 3 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है। हर साल 28 हजार करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज भरने में जा रहे हैं। ऐसे में 500 करोड़ की यह बर्बादी क्यों?

  3. बिहार सदन बनाम बिहार निवास: सरकार का नया बना 'बिहार सदन' टपक रहा है, जबकि लालू जी का बनाया पुराना भवन आज भी मजबूती से खड़ा है।

  4. बिहार भवन पर चुप्पी: बिहार निवास से भी पुराना 'बिहार भवन' है, लेकिन उसे नहीं छुआ जा रहा क्योंकि वहां लालू जी का नाम नहीं लगा है।

  5. आत्ममुग्धता का आरोप: आरोप है कि नीतीश जी ने अपनी जल्दबाजी में अभी से वहां अपना शिलापट्ट टांग दिया है।

भविष्य की चेतावनी 

नीतीश कुमार को कड़वा सच याद दिलाते हुए कहा गया है कि आज वे जिनके साथ (भाजपा) बैठे हैं, वे उनका इतिहास मिटाने में लगेंगे। दावा किया गया कि भविष्य में जब कभी पटना के किसी चौराहे पर नीतीश जी की प्रतिमा लगाने या उन्हें सम्मान देने की बारी आएगी, तो वह कार्य भी 'लालू परिवार का लाल' ही करेगा, वर्तमान सहयोगी नहीं।

  • रिपोर्ट - रंजन कुमार