Bihar tender Scam Case: IAS धर्मेंद्र कुमार से ED ने की 6 घंटे पूछताछ, आनंद किशोर समेत 3 प्रशासनिक अधिकारियों से भी होगी पूछताछ
Bihar tender Scam Case:बिहार में ठेका घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने 2013 बैच के आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र कुमार से करीब छह घंटे तक पूछताछ की।...
Bihar tender Scam Case:बिहार में टेंडर घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने 2013 बैच के आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र कुमार से करीब छह घंटे तक पूछताछ की। बुधवार को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चली इस पूछताछ में ठेकेदार रिशुश्री उर्फ रेशु रंजन के साथ उनके कथित निजी और वित्तीय संबंधों को लेकर सवाल किए गए। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार पर परिवार के साथ विदेश यात्रा के लिए ठेकेदार से आर्थिक मदद लेने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष या किसी न्यायिक फैसले से होना अभी बाकी है।
विदेश यात्रा के लिए 10 लाख रुपये के डॉलर देने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईडी की पूछताछ का एक अहम पहलू धर्मेंद्र कुमार की कथित विदेश यात्रा का खर्च है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, रिशुश्री ने उनकी विदेश यात्रा के लिए करीब 10 लाख रुपये मूल्य के डॉलर उपलब्ध कराए थे। ईडी इस कथित आर्थिक मदद के स्रोत, उसके उद्देश्य और संबंधित परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है।पूछताछ के दौरान अधिकारी से उनके कार्यकाल में स्वीकृत ठेकों, टेंडर आवंटन की प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित मामलों पर भी जानकारी मांगी गई। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित वित्तीय लेन-देन और सरकारी ठेकों के बीच कोई संबंध था या नहीं।
धर्मेंद्र कुमार बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (MD) के पद पर भी तैनात रहे थे। इसके अलावा, नगर विकास एवं आवास विभाग में अपर सचिव और बुडको के एमडी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। फिलहाल उनके पास शिक्षा विभाग के विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार है।
रिशुश्री के मोबाइल से मिले चैट और दस्तावेज जांच के दायरे में
ईडी की प्रारंभिक जांच में ठेकेदार रेशु रंजन उर्फ रिशुश्री के मोबाइल फोन से कई आईएएस अधिकारियों और उनके करीबी सहयोगियों के साथ कथित वित्तीय लेन-देन तथा व्हाट्सएप चैट मिलने की बात सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मोबाइल से विभिन्न विभागों के ठेकों से संबंधित गोपनीय दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी अलग-अलग समय पर नगर विकास एवं आवास, बुडको और जल संसाधन समेत अन्य विभागों में तैनात रहे थे। जांच एजेंसी अब कथित चैट, दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन का संबंधित अधिकारियों से सत्यापन कर रही है।ईडी की जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि सरकारी टेंडर से जुड़े दस्तावेज ठेकेदार तक कैसे पहुंचे और क्या इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ था। हालांकि, दस्तावेजों की बरामदगी या पूछताछ अपने आप में किसी अधिकारी के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
तीन और IAS अधिकारियों को भेजा गया नोटिस
रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने लगातार तीन दिनों में तीन आईएएस अधिकारियों से पूछताछ की है। मंगलवार को श्रम संसाधन विभाग के विशेष सचिव सुनील यादव और सोमवार को आईएएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा से पूछताछ की गई थी। इससे पहले बुधवार को धर्मेंद्र कुमार से सवाल-जवाब किए गए।आने वाले दिनों में आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल और योगेश सागर से भी पूछताछ किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इन अधिकारियों को ईडी की ओर से नोटिस भेजा गया है।
जांच का अगला चरण क्या होगा?
ईडी अब कथित वित्तीय लेन-देन, विदेश यात्रा पर हुए खर्च, टेंडर आवंटन और मोबाइल से मिले दस्तावेजों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। धर्मेंद्र कुमार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने की संभावना भी जांच एजेंसी के सूत्रों ने जताई है।फिलहाल मामले में जांच जारी है। आगे की कार्रवाई दस्तावेजों के सत्यापन, वित्तीय साक्ष्यों और पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। संबंधित अधिकारियों पर लगे आरोपों को जांच के अंतिम निष्कर्ष या अदालत के फैसले से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।