पटना के इस अस्पताल में महालापरवाही: कबाड़ और धूल के बीच सड़ रहीं लाखों की जीवनरक्षक दवाइयां, मरीजों की सेहत से खिलवाड़

Bihar News : सरकारी अस्पतालों में मरीज जरूरी दवाइयों के लिए भटक रहे हैं, वहीं पटना के गर्दनीबाग हॉस्पिटल में लाखों रुपये की दवाइयां, पीपी कीट्स टेस्ट स्ट्रिप्स जैसे तमाम चीजें बदहाल व्यवस्था के बीच खराब होने के कगार पर है....

कबाड़ और धूल के बीच सड़ रहीं लाखों की जीवनरक्षक दवाइयां- फोटो : अनिल कुमार

Patna : राजधानी पटना में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक तरफ सरकारी अस्पतालों में मरीज जरूरी दवाइयों के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर  गर्दनीबाग हॉस्पिटल में लाखों रुपये की दवाइयां, पीपी कीट्स, ग्लब्स, जिंक टैबलेट्स और ग्लूकोज टेस्ट स्ट्रिप्स जैसे तमाम चीजें बदहाल व्यवस्था के बीच खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। दवा भंडारण के बुनियादी मानकों की अनदेखी, पर्याप्त कोल्ड चेन सिस्टम का अभाव, स्टाफ की भारी कमी और अव्यवस्थित रखरखाव के कारण मरीजों तक पहुंचने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। व्यवस्था के अभाव में तमाम जरूरी चीजों पर धूल जम रहा, दैनिक भास्कर डिजिटल के रिपोर्टर ने अस्पताल पहुंच कुव्यवस्था की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर लिया। जो व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।


पटना जिले के 70 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों में यहां से दवा की होती है आपूर्ति 

जानकारी के अनुसार, पटना जिले के 70 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आपूर्ति के लिए 450 से ज्यादा प्रकार की दवाइयां यहां रखी जाती हैं। लेकिन इन दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही जरूरी उपकरण। हालात ऐसे हैं कि दवाओं के कार्टन कमरों से लेकर बरामदों, सीढ़ियों और गलियारों तक में बिखरे पड़े रहते हैं। कई दवाइयां नमी, गर्मी और धूल के बीच पड़ी रहती हैं,तो कई मेडिकल उपकरण जैसे हैंड ग्लब्स, पीपी कीट्स और जरूरी दवाइयां कचरे के ढेर में पड़ी हैं। जिससे उनके खराब होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।


कोल्ड चेन व्यवस्था फेलबेअसर हो सकती हैं जीवनरक्षक दवाइयां

सबसे गंभीर मामला तापमान-संवेदनशील दवाइयों को लेकर सामने आया है। इंसुलिन, विशेष इंजेक्शन और कई महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक्स जैसी दवाइयों को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है। स्थिति यह है कि पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज नहीं होने के कारण कई दवाइयों को सामान्य तापमान में रखने की मजबूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान नियंत्रित न रहने पर दवाओं की रासायनिक संरचना प्रभावित हो जाती है और उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। कई मामलों में दवाइयां पूरी तरह बेअसर भी हो जाती हैं। गर्मी और उमस के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। यदि मरीजों को ऐसी दवाइयां दी जाती हैं, जिनकी गुणवत्ता प्रभावित हो चुकी हो, तो इलाज का असर नहीं होने के साथ-साथ गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।


भारी मात्रा में दवा का स्टॉक, मरीजों ने नहीं मिलती है जरुरी दवाइयां

सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जबकि दूसरी ओर गोदामों में भारी मात्रा में दवा स्टॉक पड़ा हुआ है। अव्यवस्थित वितरण व्यवस्था और कमजोर मॉनिटरिंग के कारण जरूरत के मुताबिक समय पर दवा आपूर्ति नहीं हो पा रही। सूत्रों के मुताबिक, कई दवाइयां एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी हैं। इससे सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान तो होगा ही, मरीजों को भी इलाज में परेशानी झेलनी पड़ेगी।


दवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा असर,

अव्यवस्थित भंडारण व्यवस्था के कारण दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार तापमान नियंत्रित न होने से दवाओं की क्षमता कम हो सकती है। इंसुलिन और कई एंटीबायोटिक्स अप्रभावी या निष्क्रिय हो सकती हैं। नमी, धूल और गर्मी के कारण दवाओं की रासायनिक स्थिरता प्रभावित होती है। अव्यवस्था के कारण एक्सपायर्ड दवाओं के वितरण का जोखिम बढ़ जाता है।


क्या कहते हैं मानक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवा भंडारण के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं। इनके अनुसार दवाओं को साफ-सुथरे, तापमान नियंत्रित और सुरक्षित गोदामों में रखा जाना चाहिए। पर्याप्त कोल्ड चेन उपकरण, रैक सिस्टम, नियमित स्टॉक ऑडिट, प्रशिक्षित स्टाफ और फायर सेफ्टी व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है।


अनिल की रिपोर्ट