Patna IGIMS Scam:IGIMS में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर नकली मरीजों का काला खेल, दलालों और स्टाफ की मिलीभगत से करोड़ों का खेल उजागर,करीब चार साल से चल रहा था घोटाला
Patna IGIMS Scam: आईजीआईएमएस में आयुष्मान भारत योजना के तहत चल रहे इलाज सिस्टम में ऐसा घिनौना और सुनियोजित घपला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।...
Patna IGIMS Scam: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान ( आईजीआईएमएस) में आयुष्मान भारत योजना के तहत चल रहे इलाज सिस्टम में ऐसा घिनौना और सुनियोजित घपला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से डिजिटल हेराफेरी और कागजी मरीजों का ऐसा खेल चल रहा था, जिसमें करीब 45 लाख रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क किसी साधारण गलती का नहीं बल्कि एक सुनियोजित क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था। मरीजों को सिस्टम में कैश बेसिस मरीज दिखाकर उनसे नकद वसूली की जाती थी, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी एंट्री कर आयुष्मान योजना के तहत भुगतान निकाल लिया जाता था। यानी एक ही मरीज के नाम पर दोहरा खेल जनता से भी पैसा और सरकार से भी हेराफेरी।
जैसे ही मामला उजागर हुआ, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए छह सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित की। बुधवार को प्रशासनिक भवन में बंद कमरे में करीब दो घंटे तक मैराथन पूछताछ हुई। इस बैठक की निगरानी स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि डॉ. बिंदे कुमार ने की, जिसमें संस्थान प्रशासन, तकनीकी विभाग और आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधिकारी भी सवालों के घेरे में रहे।
जांच से पहले दो वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्य ओपीडी भवन स्थित आयुष्मान कार्यालय कक्ष संख्या-22 का निरीक्षण किया। वहीं तकनीकी टीम ने सॉफ्टवेयर सिस्टम, लॉग फाइल और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड खंगाले। इस दौरान आउटसोर्सिंग कंपनी Mehta Data Matrix के चार कर्मचारियों के कंप्यूटर सिस्टम और डिजिटल डाटा की बारीकी से जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार कई संवेदनशील और हाई सिक्योरिटी डाटा को जब्त कर लिया गया है, ताकि पूरे नेटवर्क का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा सके। आशंका है कि यह घोटाला सिर्फ 45 लाख तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा और भी बड़ा हो सकता है।
इस मामले में दो अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है एक ओर IGIMS ने आंतरिक जांच कमेटी गठित की है, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने एसआईटी बनाकर चार संविदा कर्मियों की गिरफ्तारी की तैयारी शुरू कर दी है। जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है और कई बड़े नाम भी रडार पर बताए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला मनोज झा का सामने आया, जिनके आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग की शिकायत ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया। अक्टूबर 2025 में दलालों ने उन्हें 40 हजार रुपये का लालच देकर कार्ड लिया, लेकिन न तो उन्हें पैसा मिला और न ही इलाज हुआ। इसके बावजूद सिस्टम में इलाज दिखाकर 40 हजार रुपये की निकासी कर ली गई। जांच में यह भी सामने आया कि ऐसे कई मामलों में फर्जी मरीजों के नाम पर इलाज दिखाया गया, जबकि असल में अस्पताल में कोई भर्ती या उपचार हुआ ही नहीं। यह पूरा खेल एक संगठित गिरोह द्वारा संचालित बताया जा रहा है, जिसमें तकनीकी कर्मचारी, आउटसोर्सिंग एजेंसी और कुछ अंदरूनी लोग शामिल होने की आशंका है।
स्वास्थ्य विभाग अब पूरे राज्य में आयुष्मान कार्ड के रिकॉर्ड का ऑडिट कराने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है जैसे-जैसे डिजिटल डेटा की परतें खुलेंगी, वैसे-वैसे इस घोटाले का असली चेहरा सामने आएगा।यह मामला अब सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर बैठे सफेदपोश अपराध की एक गंभीर मिसाल बनता जा रहा है, जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।