Anant Singh: मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह की नहीं खत्म होगी विधायकी! फंस गया है ये पेंच

Anant Singh:बिहार की सियासत में मोकामा के विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। ...

बाहुबली अनंत सिंह की नहीं खत्म होगी विधायकी! - फोटो : X

Anant Singh:बिहार की सियासत में मोकामा के विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। पार्टी ने न केवल उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त की है, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से उनकी विधायकी खत्म करने की कार्रवाई करने की सिफारिश भी की है। हालांकि, इस फैसले के बाद अब जेडीयू के अपने संविधान और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि यदि निष्कासन की प्रक्रिया में पार्टी के संविधान के निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं हुआ है, तो अनंत सिंह को इस फैसले को चुनौती देने का आधार मिल सकता है। 

प्रदेश अध्यक्ष के अधिकार पर उठे सवाल

विवाद की जड़ जेडीयू के संविधान की धारा 19 में निहित अनुशासनात्मक प्रावधानों को लेकर है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के संविधान में सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार और उसकी प्रक्रिया का उल्लेख है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को पार्टी के विधायक अनंत सिंह को सीधे विधायकी खत्म कराने का पत्र लिखने का अधिकार था?

रिपोर्टों में संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रदेश अध्यक्ष के अधिकारों की सीमा निर्धारित है और विधायकों, सांसदों तथा राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के मामलों में अलग प्रक्रिया लागू हो सकती है। साथ ही, यह भी सवाल उठाया गया है कि पार्टी के आदेश में निष्कासन की कार्रवाई का उल्लेख है, जबकि संविधान के संबंधित प्रावधानों में निलंबन की प्रक्रिया का जिक्र बताया जा रहा है। हालांकि, इस आधार पर कार्रवाई को स्वतः अवैध नहीं माना जा सकता। 

नीतीश कुमार की भूमिका पर टिकी निगाहें

जेडीयू के संविधान को लेकर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की भूमिका भी चर्चा में है। कुछ रिपोर्टों में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से राज्य इकाई को अधिकृत किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि विधायकी खत्म करने का फैसला किस प्राधिकार के तहत लिया गया और क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ।

यदि अनंत सिंह इस कार्रवाई को चुनौती देते हैं, तो पार्टी के संविधान और विधायकी खत्म करने के आदेश की वैधता का सवाल उठ सकता है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उन्हें इस मामले में निश्चित रूप से राहत मिल जाएगी।

आखिर किस वजह से हुई कार्रवाई?

जेडीयू ने 24 अक्टूबर को अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि अनंत सिंह ने नेतृत्व के निर्देशों की अवहेलना की, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और विधान परिषद चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया। 

विधानसभा की सदस्यता पर भी फैसला बाकी

जेडीयू ने विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश की है। लेकिन विधानसभा की सदस्यता समाप्त कराने के लिए भी जदयू संविधान में  प्रक्रियाओं का जिक्र है। विधायक की अयोग्यता पर फैसला संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के तहत विधानसभा अध्यक्ष को करना होगा।अब निगाहें इस बात पर हैं कि अनंत सिंह पार्टी के फैसले को चुनौती देते हैं या नहीं और जेडीयू अपने कदम के समर्थन में क्या संवैधानिक आधार पेश करती है। फिलहाल, यह विवाद बिहार की सियासत में संगठनात्मक अधिकार, अनुशासन और पार्टी संविधान की व्याख्या को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।