किशोरियों में नींद की कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्या, देर रात तक मोबाइल चलाना खतरनाक: डॉ. दिवाकर तेजस्वी
Patna : प्रख्यात फिजिशियन और 'पहल' (पब्लिक अवेयरनेस फॉर हेल्थफुल एपरोच फॉर लिविंग) के चिकित्सा निदेशक डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने एक बेहद गंभीर विषय पर चिंता जताई है। आर्य कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, नया टोला में आयोजित “वॉक फॉर लाइफ” कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में किशोरियों के बीच पर्याप्त नींद न लेना एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुका है। देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर सक्रियता, ऑनलाइन पढ़ाई, वेब सीरीज देखने की लत और परीक्षा के बढ़ते मानसिक दबाव के कारण अधिकांश छात्राएं अपनी नींद से समझौता कर रही हैं, जिसका सीधा और घातक असर उनके शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
12वीं कक्षा की छात्राओं के 7 से 9 घंटे सोना जरुरी : डॉ. तेजस्वी
डॉ. तेजस्वी ने वैज्ञानिक तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि विशेषकर 12वीं कक्षा की छात्राओं के लिए हर दिन कम से कम 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना बेहद जरूरी है। यदि छात्राएं पर्याप्त नींद नहीं लेती हैं, तो इससे उनकी स्मरण शक्ति (याददाश्त) कमजोर होने लगती है, जिससे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं, नींद की कमी के कारण छात्राओं में चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव, अत्यधिक चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याएं तेजी से पनप रही हैं, जो उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर रही हैं।
कम सोने से कई बीमारियों के हो रहे शिकार
शारीरिक स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों की चर्चा करते हुए डॉ. तेजस्वी ने सचेत किया कि लगातार नींद की कमी से किशोरियों में मोटापा, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस (PCOS), माइग्रेन, आंखों की कमजोरी और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) में भारी कमी जैसी गंभीर बीमारियां पैर पसार रही हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कई छात्राएं देर रात तक मोबाइल चलाने को एक सामान्य आदत मान लेती हैं, जबकि हकीकत यह है कि मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) हमारे मस्तिष्क की प्राकृतिक नींद प्रक्रिया को पूरी तरह बाधित कर देती है, जिससे समय पर नींद नहीं आती।
इस समस्या से निपटने के लिए वरिष्ठ चिकित्सक ने छात्राओं को बेहद महत्वपूर्ण टिप्स दिए और “स्लीप हाइजीन” (नींद का अनुशासन) को संतुलित भोजन व पढ़ाई जितना ही जरूरी बताया। उन्होंने छात्राओं को सलाह दी कि वे सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप या अन्य सभी डिजिटल गैजेट्स का उपयोग पूरी तरह बंद कर दें। इसके अलावा, रोज सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें, देर रात में चाय, कॉफी या कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के सेवन से बचें और शारीरिक रूप से एक्टिव रहने के लिए प्रतिदिन हल्का व्यायाम या मॉर्निंग/इवनिंग वॉक जरूर करें।
कार्यक्रम के समापन सत्र में उपस्थित सभी छात्राओं को एक स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन जीने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाने और डिजिटल अनुशासन बनाए रखने का संकल्प दिलाया गया। इस जागरूकता अभियान के विशेष अवसर पर आर्य कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रभारी प्रिंसिपल शांति कुमारी, आस्था फाउंडेशन के पुरुषोत्तम कुमार एवं धर्मेंद्र कुमार सहित शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई अन्य गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।