Land For Job Scam: आज रूटिंग हेल्थ चेकअप करवाएंगे राजद सुप्रीमो,कोर्ट में पेश होंगे लालू-राबड़ी, लैंड फॉर जॉब मामले में अब होगी डे-टूडे सुनवाई

Land For Job Scam: लालू परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने वाली है। लालू और राबड़ी देवी कल कोर्ट में पेश हो सकते हैं। बता दें कि, लैंड फॉर जॉब मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1 फरवरी से 25 फरवरी तक पेश होने का समय दिया था।

आज रूटिंग हेल्थ चेकअप करवाएंगे राजद सुप्रीमो- फोटो : social media

Land For Job Scam:  बिहार की सियासी माहौल  एक बार फिर गरमा गई है। जमीन के बदले नौकरी मामले में  राऊज एवेन्यू कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है, जहां राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पेश होंगे। दोनों रविवार को ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और आज रूटीन हेल्थ चेकअप कराने की तैयारी में हैं।

इस बहुचर्चित केस में इससे पहले 9 फरवरी को तेजस्वी यादव अदालत में हाजिर हो चुके हैं। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने लालू परिवार को 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच पेश होकर कागजी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया था।

मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने लालू प्रसाद यादव समेत 78 लोगों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव के नाम भी शामिल हैं।

सियासी गलियारों में इस पेशी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्ष इसे जवाबदेही की घड़ी बता रहा है, तो समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे रहे हैं। अब निगाहें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां आने वाला दिन बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

तेजस्वी भी हुए थे पेश

दरअसल, लैंड फॉर जॉब मामले में कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को पेशी के लिए एक माह का समय दिया था। 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच अदालत में उपस्थित होना था। बता दें कि, 29 जनवरी को हुए सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरोपों की औपचारिक गठन के लिए 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच लालू-राबड़ी, तेजस्वी और तेज प्रताप यादव को अदालत में उपस्थित होना होगा। जिसके बाद 9 फरवरी को तेजस्वी यादव दिल्ली में राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान तेजस्वी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और कहा कि वह केस लड़ेंगे और कोर्ट में आरोपों का सामना करेंगे।

लैंड फॉर जॉब मामला क्या है

लैंड फॉर जॉब मामला केंद्र की राजनीति और बिहार की सियासत से जुड़ा एक चर्चित मामला है। यह प्रकरण उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, कई अभ्यर्थियों को रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले पटना और आसपास के इलाकों में स्थित जमीनें रियायती दर पर या दान के रूप में लालू परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम कराई गईं। यह जमीनें बाद में काफी मूल्यवान साबित हुईं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पिछले सुनवाई में विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति हासिल करने की एक व्यापक साजिश रची गई। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि मामले में गंभीर आरोप हैं, जिनकी सुनवाई ट्रायल में की जानी चाहिए। अदालत के अनुसार यह मामला केवल अनियमित नियुक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि कथित रूप से एक संगठित आपराधिक साजिश से जुड़ा है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है और बचाव पक्ष को ट्रायल के दौरान अपने पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

CBI की चार्जशीट और आरोप

जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि यह कथित साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस अवधि में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर के रेलवे जोनों में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले जमीन ली गई। CBI के मुताबिक, नियुक्ति से पहले ही जमीनें लालू परिवार के सदस्यों या एक निजी कंपनी के नाम ट्रांसफर की गईं।

दोषी साबित होने पर क्या करेगा लालू परिवार 

जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कई मामलों में गिफ्ट डीड के जरिए जमीन हस्तांतरित की गई। चार्जशीट में कुल 103 आरोपियों का जिक्र है, जिनमें से पांच की मृत्यु हो चुकी है। अदालत ने अभियोजन स्वीकृति से जुड़े मामलों में CBI को प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। अब आरोप तय होने के बाद नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें साक्ष्य और गवाहों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। यदि इस दौरान लालू परिवार पर आरोप सिद्ध होता है तो वो ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं।

रिपोर्ट- धीरज कुमार सिंह