Bihar CO Strike: बिहार में जमीन का काम ठप! राजस्व अफसरों की बगावत, अनिश्चतकालीन सामूहिक हड़ताल पर क्यों हैं सीओ, पढ़िए

Bihar CO Strike: अंचलाधिकारी, राजस्व पदाधिकारी और कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने पूरे प्रदेश में जमीन से जुड़े कामकाज को लगभग ठप कर दिया है।...

अनिश्चतकालीन सामूहिक हड़ताल पर क्यों हैं सीओ?- फोटो : reporter

Bihar CO Strike:बिहार की प्रशासनिक और सियासी फिज़ा इन दिनों एक नए विवाद से गर्मा गई है। अंचलाधिकारी, राजस्व पदाधिकारी और कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने पूरे प्रदेश में जमीन से जुड़े कामकाज को लगभग ठप कर दिया है। रजिस्ट्री, म्यूटेशन, दाखिल-खारिज और भूमि से जुड़े कई अहम काम प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।

हालांकि बिहार राजस्व सेवा संघ ने साफ लफ्ज़ों में कहा है कि उनकी जंग सरकार से नहीं, बल्कि न्याय और हक की बहाली के लिए है। संघ का कहना है कि उनकी सिर्फ एक ही मांग है—पटना हाई कोर्ट के आदेश को पूरी तरह लागू किया जाए।

दरअसल, मामला डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) के पद को लेकर है। बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010 के मुताबिक DCLR का पद राजस्व सेवा का द्वितीय प्रोन्नति स्तर माना जाता है। यानी राजस्व अधिकारी पहले अंचलाधिकारी बनते हैं और उसके बाद पदोन्नति पाकर DCLR के पद पर पहुंचते हैं।

बताया जाता है कि वर्ष 2023 में सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के आधार पर 100 से अधिक राजस्व अधिकारियों को DCLR पद पर प्रोन्नति दी गई थी। लेकिन प्रोन्नति मिलने के बावजूद इन अधिकारियों को उस पद पर वास्तविक पदस्थापन नहीं दिया गया, जिससे असंतोष बढ़ता चला गया।

इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया गया। फरवरी 2024 में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया था कि लोकसभा चुनाव के बाद इन अधिकारियों को DCLR के पद पर तैनाती दे दी जाएगी। लेकिन जब लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अधिकारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

पटना हाई कोर्ट ने 19 जून 2025 और 1 जुलाई 2025 के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रोन्नत राजस्व अधिकारियों को तीन महीने के भीतर DCLR के पद पर पदस्थापित किया जाए। बावजूद इसके आदेश का पालन नहीं हुआ, जिसके बाद अदालत में अवमानना याचिका भी दायर की गई।

राजस्व सेवा संघ का आरोप है कि सरकार ने कोर्ट के आदेश से बचने के लिए ADLAO नाम का नया पद सृजित कर दिया और बाद में कैबिनेट के फैसले से DCLR का पद राजस्व सेवा से हटाकर बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अधिकारियों को दे दिया।

यही फैसला अब विवाद की जड़ बन गया है। संघ के मुताबिक अदालत के आदेश और सरकार के आश्वासन के बावजूद जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो मजबूर होकर 2 फरवरी 2026 से राजस्व अधिकारियों ने अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश का रास्ता अपनाया।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार और राजस्व अधिकारियों के बीच यह टकराव जल्द खत्म होगा या फिर बिहार में जमीन से जुड़े कामों की यह बंदिश सियासत और प्रशासन दोनों के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगी।