Bihar Politics : बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने विपक्षी नेताओं पर किया जोरदार हमला, कहा- संसद में सनातन संस्कृति का उपहास उड़ाना बंद करे विपक्ष

Bihar Politics : मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा की एक दौर में बॉलीवुड की फिल्मों में सनातन संस्कृति, साधु-संतों, पंडित-पुजारियों, तिलक-चोटी और धार्मिक प्रतीकों को हास्य तथा उपहास का विषय बनाना जैसे फैशन बन गया था।

विपक्ष पर हमला - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने विपक्ष के राजनीतिक रवैये पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान सनातन परंपराओं के प्रतीकों के इस्तेमाल पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे करोड़ों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि एक दौर में बॉलीवुड की फिल्मों में सनातन संस्कृति, साधु-संतों, पंडित-पुजारियों, तिलक-चोटी और धार्मिक प्रतीकों को हास्य तथा उपहास का विषय बनाना एक फैशन सा बन गया था। मनोरंजन के नाम पर वर्षों तक सनातन परंपराओं का मजाक उड़ाया गया और दुर्भाग्य से आज वही मानसिकता और भौंडापन विपक्ष की राजनीति में भी साफ झलकने लगा है।

उन्होंने संसद की मर्यादा का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करने, सवाल पूछने और प्रदर्शन करने की पूरी स्वतंत्रता है। लेकिन पुजारी के वेश और सनातन के धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों को राजनीतिक व्यंग्य और तमाशे का माध्यम बनाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। जो भौंडापन कभी सिनेमा के पर्दे पर दिखता था, आज वही विपक्ष संसद की चौखट पर दोहरा रहा है।

विपक्षी नेताओं को सीधे आड़े हाथों लेते हुए मंत्री ने कहा, "चाहे राहुल गांधी हों, पप्पू यादव हों या विपक्ष का कोई अन्य नेता—राजनीतिक लड़ाई राजनीति के स्तर पर लड़ी जानी चाहिए। सरकार को घेरिए और उसकी नीतियों पर तीखे सवाल उठाइए, लेकिन सनातन संस्कृति और उसके प्रतीकों को अपने राजनीतिक तमाशे का पात्र मत बनाइए।" मंत्री डॉ. सुमन ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक संघर्ष और विरोध की पूरी जगह है, लेकिन किसी की आस्था के उपहास और भौंडेपन की कतई अनुमति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मर्यादा का प्रश्न नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है।