Shambhu Girls Hostel: नीट छात्रा की संदिग्ध मौत पर सिस्टम की टूटी नींद , DGP दरबार से गृह मंत्री तक हड़कंप, थानेदार निलंबित, SIT को सख़्त हिदायत
Shambhu Girls Hostel: नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला राजधानी की फिज़ाओं में उठती इंसाफ़ की सिसकी ने पुलिस के आला अफ़सरों से लेकर सत्ता के गलियारों तक हलचल मचा दी है।
Shambhu Girls Hostel: नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब केवल एक केस फ़ाइल नहीं रहा, बल्कि इंसाफ़, ज़िम्मेदारी और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है। राजधानी की फिज़ाओं में उठती इंसाफ़ की सिसकी ने पुलिस के आला अफ़सरों से लेकर सत्ता के गलियारों तक हलचल मचा दी है। शनिवार को मृतका के परिजन जब सीधे डीजीपी विनय कुमार के दरबार पहुंचे, तो यह साफ़ हो गया कि ज़मीनी तफ्तीश पर भरोसा पूरी तरह डगमगा चुका है।
करीब आधे घंटे तक चली बातचीत में मृतका के पिता ने डीजीपी को एक लिखित आवेदन सौंपते हुए एसआईटी जांच के कई बिंदुओं पर सवाल उठाए और निष्पक्ष, तेज़ व गहराई से जांच की गुहार लगाई। पिता की दलीलों और तथ्यों को गंभीरता से पढ़ने के बाद डीजीपी ने तुरंत पटना आईजी से बातचीत की। इसके बाद पूरा महकमा हरकत में आया।
आईजी से चर्चा के बाद डीजीपी ने एसएसपी पटना से लेकर एसआईटी चीफ एसडीपीओ सचिवालय वन तक को तलब कर लिया। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली समीक्षा बैठक में केस की एक-एक कड़ी को खंगाला गया। इस दौरान डीजीपी ने जांच में हुई चूक, ढिलाई और भटकाव पर सख़्त नाराज़गी जताते हुए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। साफ कहा गया कि तफ्तीश अब किसी भी सूरत में प्रभावित या दिशाहीन नहीं होनी चाहिए।
इसी समीक्षा का नतीजा था कि चित्रगुप्त नगर थाना की SHO रश्मि कुमारी और कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष हिमांशु झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई एसएसपी पटना ने डीजीपी के निर्देश पर की। खास बात यह रही कि निलंबन आदेश मध्य रात्रि में जारी हुआ, जिसने यह संकेत दे दिया कि मामला अब बेहद संगीन मोड़ पर पहुंच चुका है।
इधर, आज इस पूरे प्रकरण पर गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने भी मोर्चा संभाल लिया। करीब एक घंटे तक चली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में डीजीपी, एडीजी सीआईडी, आईजी पटना, एसएसपी पटना, एसआईटी चीफ और एसआईटी में शामिल तीन इंस्पेक्टर गृह मंत्री के सामने पेश हुए। गृह मंत्री ने जांच की रफ्तार पर सवाल करते हुए साफ शब्दों में कहा कि अब किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा के क्रम में गृह मंत्री ने जांच में और तेजी लाने, साक्ष्यों को पुख़्ता करने और दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख़्त कार्रवाई के निर्देश दिए। संदेश साफ़ है—यह मामला अब सिर्फ पुलिस का नहीं, बल्कि सरकार की साख से भी जुड़ चुका है।
अब सवाल यही है कि क्या यह प्रशासनिक सख़्ती सच तक पहुंचेगी, या फिर यह केस भी फाइलों के बोझ तले दब जाएगा? राजधानी पटना की निगाहें अब आने वाले दिनों की तफ्तीश पर टिकी हैं, जहां हर कदम पर इंसाफ़ की परीक्षा होनी है।