PMCH में आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, कई सेवाओं पर पड़ा असर
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें पांच महीने का बकाया वेतन तत्काल भुगतान, सेवा की निरंतरता और नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, सामाजिक एवं रोजगार सुरक्षा की गारंटी आदि शामिल हैं.
Strike in PMCH : सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल लगातार जारी है। बकाया वेतन, नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और सेवा सुरक्षा समेत पांच सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे वार्ड अटेंडेंट्स के प्रदर्शन का असर अब अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। इमरजेंसी से लेकर सामान्य वार्डों तक मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अपनी मांगों को लेकर निजी एजेंसी के माध्यम से बहाल वार्ड अटेंडेंट AICCTU के बैनर तले पटना स्थित नियोजन भवन (श्रम संसाधन विभाग) के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करने पहुंचे। प्रदर्शनकारी कर्मियों का आरोप है कि PMCH में कार्यरत आउटसोर्सिंग एजेंसी फ्रंटलाइन बिजनेस सॉल्यूशन पिछले पांच महीनों से उनका वेतन जारी नहीं कर रही है। इतना ही नहीं, वेतन का भुगतान भी निर्धारित मानकों से कम किया जाता है।
कर्मियों का कहना है कि उन्हें केवल 30 जुलाई तक सेवा में बनाए रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे उनके भविष्य को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका आरोप है कि एजेंसी और PMCH प्रशासन उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें पांच महीने का बकाया वेतन तत्काल भुगतान, सेवा की निरंतरता और नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, सामाजिक एवं रोजगार सुरक्षा की गारंटी तथा श्रम संसाधन विभाग द्वारा न्यूनतम मजदूरी कानून का PMCH में सख्ती से पालन सुनिश्चित करना शामिल है।
कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, हड़ताल के कारण प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित होने से मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस विवाद का समाधान कब तक निकालते हैं।
अनिल की रिपोर्ट