प्रशांत किशोर को लगा बड़ा झटका, जन सुराज के दो पूर्व प्रत्याशी केसी सिन्हा और बिट्टू सिंह भाजपा में शामिल

प्रो. केसी सिन्हा ने वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में कुम्हरार विधानसभा सीट से जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जबकि बिट्टू सिंह दीघा विधानसभा सीट से पार्टी के प्रत्याशी थे।

 KC Sinha and Bittu Singh join BJP
KC Sinha and Bittu Singh join BJP- फोटो : news4nation

Bankipur :  बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के दो प्रमुख चेहरे और वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार रहे प्रो. केसी सिन्हा और बिट्टू सिंह ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दोनों नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। 


प्रो. केसी सिन्हा ने वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में कुम्हरार विधानसभा सीट से जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जबकि बिट्टू सिंह दीघा विधानसभा सीट से पार्टी के प्रत्याशी थे। दोनों नेताओं का भाजपा में शामिल होना जन सुराज के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर स्वयं बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे हैं।


प्रो. केसी सिन्हा जन सुराज अभियान की शुरुआत से ही प्रशांत किशोर के करीबी सहयोगियों में शामिल रहे हैं। संगठन निर्माण से लेकर जन संवाद कार्यक्रमों तक उनकी सक्रिय भूमिका रही। शिक्षाविद् के रूप में पहचान रखने वाले प्रो. सिन्हा का जन्म 29 दिसंबर 1954 को भोजपुर में हुआ था। वे गणित के प्रख्यात विद्वान हैं और पटना विश्वविद्यालय के एक कॉलेज के प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने के बाद नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) भी रह चुके हैं। दो वरिष्ठ नेताओं के भाजपा में शामिल होने से बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले जन सुराज को संगठनात्मक झटका लगा है। राजनीतिक जानकार इसे चुनावी माहौल के बीच भाजपा की बड़ी रणनीतिक बढ़त के रूप में देख रहे हैं।


बांकीपुर में प्रतिष्ठा की लड़ाई

30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर पूरे बिहार की नजर है। इस चुनाव में पहली बार प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में यह उपचुनाव उनके राजनीतिक भविष्य और जन सुराज की ताकत की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। बांकीपुर सीट पर उपचुनाव भाजपा के वरिष्ठ नेता और पांच बार के विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद हो रहा है। उनके इस्तीफे से यह सीट खाली हुई, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।


भाजपा का मजबूत गढ़ है बांकीपुर

राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले करीब 30 वर्षों से भाजपा का अभेद्य गढ़ मानी जाती है। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का लगातार कब्जा है। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और उनके निधन के बाद 2006 के उपचुनाव से नितिन नवीन लगातार यहां से विधायक चुने जाते रहे। उन्होंने 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज कर इस सीट पर भाजपा की पकड़ और मजबूत की।


ऐसे में भाजपा जहां इस सीट पर अपना दबदबा बरकरार रखने की कोशिश में है, वहीं प्रशांत किशोर पहली बार चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करने की चुनौती का सामना कर रहे हैं। इसी बीच जन सुराज के दो पूर्व विधानसभा प्रत्याशियों का भाजपा में शामिल होना उपचुनाव से पहले पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

नरोत्तम की रिपोर्ट