ओवैसी की AIMIM ने हुमायूं कबीर से तोड़ा गठबंधन, पश्चिम बंगाल में वीडियो वायरल होते ही सियासी भूचाल, 100 सीट पर मुस्लिम पकड़

1000 करोड़ रुपए की इस डील से जुड़े कथित वीडियो के वायरल होते ही हुमायूं कबीर को TMC ने भाजपा की बी टीम कहा है और अब असदुद्दीन ओवैसी ने उनसे अपना सियासी नाता तोड़ दिया है।

Owaisis_Humayun Kabir- फोटो : news4nation

 AIMIM : दो चरणों में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले AIMIM ने हुमायूं कबीर से सियासी गठबंधन तोड़ लिया है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक कथित वीडियो के सामने आने से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस वीडियो में आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर कथित रूप से एक भाजपा नेता का नाम लेते हुए चुनाव में पैसे के इस्तेमाल की बात करते सुने जा रहे हैं। हालांकि इस वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और कुछ लोग इसके साथ छेड़छाड़ की आशंका भी जता रहे हैं। 


1000 करोड़ रुपए की इस डील से जुड़े वीडियो के बाद हुमायूं कबीर को भाजपा की बी टीम कहा जाने लगा। वहीं वीडियो के वायरल होते ही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हुमायूं कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन समाप्त करने का एलान कर दिया। पार्टी ने 10 अप्रैल की सुबह सोशल मीडिया के जरिए यह घोषणा की। AIMIM ने अपने बयान में कहा कि वह किसी भी ऐसे बयान या गतिविधि से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिससे मुसलमानों की ईमानदारी पर सवाल उठे। पार्टी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के मुसलमान लंबे समय से उपेक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में शामिल रहे हैं और उनके मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया।


बदेलगा सियासी समीकरण 

गौरतलब है कि हाल ही में 25 मार्च को हुमायूं कबीर और AIMIM के बीच गठबंधन की घोषणा हुई थी। उस समय कबीर ने ओवैसी को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए इस गठबंधन को राज्य में एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में पेश किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह गठजोड़ सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। लेकिन वोटिंग से ठीक पहले सामने आए इस विवादित वीडियो ने इस संभावित समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। अब AIMIM का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला राज्य की सियासत में नए समीकरण पैदा कर सकता है। इससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा होने की संभावना भी बढ़ गई है, जिसका सीधा फायदा अन्य दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस को मिल सकता है।


पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोटर की भूमिका

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 27 से 30 प्रतिशत के बीच है। करीब 100 से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी मानी जाती हैं, जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव (2021) में लगभग 44 मुस्लिम विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, जिनमें अधिकांश तृणमूल कांग्रेस से थे। यही कारण है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस वोट बैंक को साधने की कोशिश करते रहते हैं।


टीएमसी के निशाने पर भाजपा

ऐसे में AIMIM और हुमायूं कबीर के बीच टूटा यह गठबंधन चुनावी गणित पर असर डाल सकता है। विशेषकर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी जो पहले से ही भाजपा पर राज्य में सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगा रही है उसके निशाने पर अब भाजपा आ गई है। पार्टी की ओर से कई नेताओं ने कहा है कि हुमायूं कबीर को भाजपा की रणनीति के हिसाब से राज्य में उतरा गया है। भाजपा की कोशिश राज्य में मुस्लिम और धर्मनिरपेक्ष वोटरों के बीच सेंधमारी करनी है लेकिन वीडियो वायरल होने से सब साफ हो गया।