टीबी मुक्त भारत अभियान:पटना के बिक्रम स्वास्थ्य केंद्र में सघन जांच और जागरूकता अभियान,47 टीबी मरीजों का इलाज जारी,निक्षय योजना से प्रतिमाह मिलेंगे ₹1000

पटना जिले के बिक्रम सीएचसी में टीबी की समय पर पहचान और मुफ्त इलाज के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। निक्षय योजना के तहत मरीजों को हर महीने ₹1,000 की पोषण सहायता भी मिल रही है। लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं!

पटना के बिक्रम स्वास्थ्य केंद्र में सघन जांच और जागरूकता अभियान- फोटो : Reporter

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत पटना जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बिक्रम में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और नि:शुल्क उपचार को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि 24 मार्च 2026 से 14 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस देशव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य टीबी के मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें समुचित चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इस अभियान के तहत पूरे देश में एक करोड़ लोगों की टीबी स्क्रीनिंग करने का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


बिक्रम सीएचसी में 47 मरीजों का इलाज जारी, लक्षण दिखने पर तुरंत जांच की अपील

डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में बिक्रम सीएचसी में 47 टीबी मरीजों का नियमित और मुफ्त इलाज चल रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को एक सप्ताह से अधिक समय से खांसी, तेज बुखार, बलगम में खून आना, छाती में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या लगातार वजन कम होने जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी मुख्य रूप से दो प्रकार—पल्मोनरी (फेफड़ों की टीबी) और एक्स्ट्रा पल्मोनरी (अन्य अंगों की टीबी)—की होती है और सही समय पर इलाज शुरू होने से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है।

निक्षय योजना के तहत मरीजों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की पोषण सहायता

टीबी मुक्त भारत के संकल्प को मजबूती देने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन का उल्लेख करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि निक्षय योजना के अंतर्गत प्रत्येक टीबी मरीज को इलाज के दौरान प्रति माह 1,000 रुपये की पोषण सहायता राशि प्रदान की जाती है। यह आर्थिक सहायता मरीज के बैंक खाते में तब तक भेजी जाती है जब तक कि वह पूरी तरह स्वस्थ न हो जाए, ताकि मरीज को इलाज के दौरान सही खान-पान और पौष्टिक आहार लेने में किसी प्रकार की आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।


मरीजों से भेदभाव न करने की अपील, सामाजिक सहयोग से हारेगा टीबी

अभियान के अंत में डॉ. राजेश कुमार ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे टीबी पीड़ितों के प्रति अपनी सोच बदलें और उनके साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक भेदभाव न करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जन-जागरूकता, स्वच्छ दिनचर्या, पौष्टिक भोजन, समय पर जांच और नियमित दवा के सेवन से टीबी जैसी बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। उन्होंने बिक्रम क्षेत्र के निवासियों से इस राष्ट्रव्यापी टीबी मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने और स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करने का आह्वान किया।

बिक्रम से ऋषिकेश की रिपोर्ट