Patna High Court: दो पिता के दावे ने उलझाया मामला, बच्ची की कस्टडी पर हाईकोर्ट सख्त, होगा DNA टेस्ट

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए बच्ची को चाइल्ड केयर होम में रखने का आदेश दिया है।...

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए बच्ची को मधुबनी के चाइल्ड केयर होम में रखने का आदेश दिया है। अदालत ने बच्ची समेत उस पर दावा करने वाले दोनों व्यक्तियों का डीएनए टेस्ट कराने का भी निर्देश दिया है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वर्ष 2014 में राकेश कुमार सिंह की शादी पूजा कुमारी से हुई थी, लेकिन चार-पांच महीने बाद पूजा ने राघवेंद्र कुमार से शादी कर ली। राघवेंद्र कुमार केनरा बैंक, मुंबई में सीनियर मैनेजर हैं। उन्होंने हलफनामे में दावा किया कि उनकी शादी पूजा से 22 अप्रैल 2015 को हुई थी और 8 फरवरी 2016 को समस्तीपुर के कृष्णा अस्पताल में बच्ची का जन्म हुआ था। उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र, साथ की तस्वीरें और सुकन्या समृद्धि योजना की पासबुक भी अदालत में पेश की। उनके मुताबिक खाते में करीब 11 लाख रुपये का बैलेंस है।

अदालत को बताया गया कि पूजा मधुबनी के डेलडीहा पूर्वी +2 उच्च विद्यालय में कार्यरत थीं और अपनी बेटी के साथ राकेश के मकान में किराए पर रहती थीं। 9 जून को सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। इस मामले में ट्रैफिक थाना में केस संख्या 105/2026 दर्ज है। आरोप है कि परिवार को सूचना दिए बिना राकेश ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया और अब मृतका को अपनी पत्नी बताकर नौकरी से जुड़े लाभ पर दावा कर रहा है।

अदालत ने पाया कि राकेश के पास शादी का ठोस प्रमाण नहीं है। उसके पास मंदिर की 1100 रुपये की हस्तलिखित रसीद ही बताई गई। कोर्ट ने बच्ची से बातचीत भी की और प्रथमदृष्टया महसूस किया कि उसे पूरी तरह सिखा-पढ़ाकर बयान देने की स्थिति में रखा गया हो सकता है।

हाईकोर्ट ने डीएम, एसपी और मधुबनी डीएलएसए को बच्ची की सुरक्षा और सम्मानजनक देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। सीडब्ल्यूसी को चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से बच्ची की काउंसलिंग कराने को कहा गया है। वहीं डीएम और सिविल सर्जन को बच्ची, राकेश और राघवेंद्र का डीएनए टेस्ट कराकर रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है। अगली सुनवाई तक किसी भी व्यक्ति को बच्ची से मिलने की अनुमति नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी।