नालंदा DM के मनमाने आदेश पर पटना हाईकोर्ट की सख्त फटकार,मौलिक अधिकारों के हनन पर सरकार को भरना होगा हर्जाना, जिम्मेदार अफसर से भी होगी वसूली
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने नालंदा के जिलाधिकारी द्वारा पारित एक आदेश को मनमाना और कानून के विरुद्ध करार देते हुए उसे रद्द कर दिया है।
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने डीएम, नालंदा द्वारा पारित मनमाने आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को बतौर मुआवजा एक लाख रुपए देने का आदेश दिया।कोर्ट ने पीड़ित नागरिक के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए वाद व्यय के लिए दस हजार रुपए देने का आदेश हुआ।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने राजेश कुमार की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि पुराने मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को असामाजिक घोषित नहीं किया जा सकता हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसो व्यक्ति को असामाजिक घोषित कर उसकी आवा-जाही पर रोक लगाना उस व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन हैं।
कोर्ट ने राजेश कुमार द्वारा क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए 20 मार्च, 2026 के नालंदा के जिलाधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया।इस व्यक्ति के खिलाफ 2021 के बाद कोई मामला दर्ज नहीं हुआ हैं।
बीसीसीए कानून के तहत इस तरह की कार्रवाई तभी सम्भव हैं,जबकि चौबीस माह के भीतर कम से कम दो मामलों में पुलिस रिपोर्ट कोर्ट में बीसीसीए के प्रावधान के अनुसार दायर किये गए हो। डीएम, नालंदा के बीसीसीए के अंतर्गत जारी आदेश में ये कहा गया था कि राजेश एक महीने दो दिन सोमवार और शुक्रवार को सिलाव थाने में हाजरी लगायेगा।डीएम, नालंदा के इस आदेश को चुनौती देते हुए पटना हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की।
कोर्ट ने मामलें पर सुनवाई करते हुए डीएम, नालंदा के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को बतौर मुआवजा एक लाख रुपए एक माह में देने का आदेश दिया।साथ ही वाद व्यय के लिए दस हजार रुपए देने का आदेश पारित हुआ। ये धनराशि इस के लिए जिम्मेदार अधिकारी से वसूला जायेगा।