ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ पटना हाईकोर्ट का 'सेंसर' प्लान; केंद्र से पूछा- बिहार के हाईवे पर आधुनिक मशीनें क्यों नहीं?

पटना हाईकोर्ट ने बिहार से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडेड वाहनों के आतंक को रोकने के लिए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए तकनीक का सहारा लेने की वकालत की है।

Patna - पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस विवेक चौधरी की खंडपीठ ने अधिवक्ता विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि बिहार के राजमार्गों पर अन्य राज्यों के एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर सेंसर युक्त भार मापक मशीनें क्यों नहीं लगाई जा सकतीं। इन मशीनों के लगने से क्षमता से अधिक भार वाले वाहन टोल प्लाजा या प्रवेश द्वार पर स्वतः ही रोक दिए जाएंगे।

भ्रष्ट गठजोड़ पर महाधिवक्ता का प्रहार

सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में बहस कर रहे महाधिवक्ता पी.के. शाही ने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि पुलिस, प्रशासन, एनएचएआई की एजेंसियों और परिवहन विभाग के अधिकारियों के बीच एक ऐसा मजबूत गठजोड़ बन गया है, जिसे तोड़ना कठिन है। उन्होंने दलील दी कि एक भ्रष्ट कर्मी पूरे तंत्र को दूषित कर देता है, लेकिन तकनीक और मशीनें निष्पक्ष होती हैं।

नवनिर्मित पुलों और सड़कों को पहुँच रहा नुकसान

महाधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि विशेषकर भोजपुर और रोहतास जैसे जिलों में बालू और गिट्टी लदे ओवरलोडेड वाहन राजमार्गों पर बेधड़क दौड़ रहे हैं। इन भारी वाहनों के कारण राज्य के नवनिर्मित पुल और पुलिया समय से पहले क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। यह न केवल आर्थिक क्षति है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा है।

केंद्र से ठोस निदान की मांग

हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता की दलीलों की सराहना की और भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल डॉ. के.एन. सिंह को इस मामले में एक ठोस और सुचारू योजना पेश करने का अनुरोध किया है। कोर्ट का मानना है कि मशीन आधारित चेकिंग से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

अगली सुनवाई का समय

इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी, जिसमें केंद्र सरकार को सेंसर मशीनों की स्थापना और ओवरलोडिंग रोकने की अपनी योजना का विवरण कोर्ट के समक्ष रखना होगा।