Patna IAS Arrest: SVU ने एक IAS समेत तीन लोगों को किया गिरफ्तार,रिशु श्री कांड में बड़ा धमाका, संजीव हंस फरार, कई और बड़े चेहरों पर लटक रही तलवार

विशेष निगरानी ईकाई ने कार्रवाई के दौरान आईएएस अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, इंजीनियर तारणी दास और इंजीनियर उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।...

विशेष निगरानी ईकाई ने एक IAS समेत तीन लोगों को किया गिरफ्तार- फोटो : social Media

Patna IAS Arrest: सरकारी ठेकों में कथित कमीशनखोरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित रिशु श्री प्रकरण में जांच एजेंसियों ने शिकंजा और कस दिया है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने बिहार की नौकरशाही और ठेकेदारी जगत में खलबली मचा दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, इंजीनियर तारिणी दास और इंजीनियर उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है, जबकि आईएएस  संजीव हंस की तलाश तेज कर दी गई है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि ठेकेदार रिशु श्री के जरिए सरकारी ठेकों में कमीशनखोरी और प्रभाव के दम पर करोड़ों रुपये के खेल को अंजाम दिया गया।  एसवीयू ने अब तक संजीव हंस, तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और बीएमएसआईसीएल के डीजीएम (प्रोजेक्ट) पंकज कुमार समेत कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।

मुमुक्षु चौधरी पर आरोप है कि सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए उन्होंने कथित रूप से रिशु श्री की कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए कमीशन लेकर ठेके आवंटित किए। 27 मार्च 2025 को ईडी की छापेमारी में उनके ठिकाने से करीब दो करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया था। वर्तमान में वे वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात हैं और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच जारी है।

वहीं संजीव हंस पर जल संसाधन, ऊर्जा और अन्य विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए रिशु श्री की कंपनियों को कथित फायदा पहुंचाने का आरोप है। ईडी, सीबीआई और एसवीयू की अलग-अलग जांचों में उनका नाम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार फिलहाल उनका ठिकाना स्पष्ट नहीं है और एजेंसियां उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।

पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास भी जांच के घेरे में हैं। ईडी की छापेमारी में उनके यहां से करोड़ों रुपये नकद बरामदहुआ  था। जांच एजेंसियों को यह भी सुराग मिला है कि रिशु श्री से जुड़ी एक अतिरिक्त कंपनी के माध्यम से कथित तौर पर काले धन को सफेद करने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।

जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित भ्रष्टाचार तंत्र से किन-किन अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचा। हालांकि सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल इस कार्रवाई ने सत्ता, सिस्टम और ठेकेदारी जगत में बेचैनी बढ़ा दी है।

रिपोर्ट- रंजीत कुमार