पटना का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित, उपेंद्र कुशवाहा के रालोमो ने लिया बड़ा संकल्प
विमर्श शिविर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में बिहार के विकास, शिक्षा, सामाजिक न्याय, युवाओं और संगठन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
Bihar News : उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो ने पटना का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया है। राजगीर में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के तीन दिवसीय विमर्श शिविर में बिहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। पार्टी ने बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर ‘पाटलिपुत्र’ करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इससे बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान मिलेगा। इस प्रस्ताव की पुष्टि हालिया रिपोर्टों में भी की गई है।
विमर्श शिविर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में बिहार के विकास, शिक्षा, सामाजिक न्याय, युवाओं और संगठन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। रालोमो ने आने वाले वर्षों में बिहार को विकास के शिखर पर ले जाने का संकल्प भी लिया।
शिक्षा और सामाजिक न्याय पर जोर
पार्टी के प्रस्तावों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसके तहत नवोदय विद्यालय की तर्ज पर प्रत्येक जिले में स्कूल स्थापित करने और बच्चों को पढ़ाई, रहने तथा भोजन की मुफ्त आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा सामाजिक न्याय की अवधारणा को जमीन पर उतारने और युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही गई है।
पटना का नाम पाटलिपुत्र करने की मांग
विमर्श शिविर में पारित प्रमुख प्रस्तावों में पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग शामिल रही। पार्टी ने इसे बिहार की ऐतिहासिक विरासत और पहचान से जोड़ते हुए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
सम्राट अशोक और चाणक्य की प्रतिमाओं का प्रस्ताव
रालोमो ने पटना के प्रमुख स्थानों पर सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य और आचार्य चाणक्य की प्रतिमाएं लगाने का भी प्रस्ताव रखा है। साथ ही सम्राट अशोक की जयंती पर देशभर में अवकाश घोषित करने की मांग की गई है।
कोसी बाढ़ के स्थायी समाधान पर जोर
शिविर में कोसी क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। इसके लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही देश में परिसीमन लागू करने के लिए प्रयास करने और 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर महिला शिक्षक दिवस घोषित करने जैसे प्रस्ताव भी रखे गए हैं।