सत्ता परिवर्तन का नया रंग! सीएम सम्राट ने खत्म किया नीतीश की ब्लू पहचान, बिहार में भाजपा सरकार ने अपनाया 'भगवा'

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब बिहार में राज्य सरकार की योजनाओं पर भाजपा के रंग का असर चढने लगा है, इसमें भाजपा के भगवा रंग में राज्य के कार्यक्रमों को रंगने की कवायत सहयोग कार्यक्रम के बोर्ड से हुई है

Saffron in Bihar Government Program- फोटो : news4nation

Saffron in Bihar Government Program : बिहार की सत्ता में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव साफ दिखाई देने लगे हैं। सरकार ने न केवल आम जनता की शिकायतों के निस्तारण की नई व्यवस्था शुरू की है, बल्कि उसके स्वरूप और प्रतीकों में भी बदलाव किया गया है। सबसे अधिक चर्चा उस बोर्ड को लेकर हो रही है, जिसका रंग अब नीले (ब्लू) से बदलकर भगवा कर दिया गया है। 


पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में जनता से सीधे संवाद के लिए 'जनता के दरबार में मुख्यमंत्री' कार्यक्रम आयोजित होता था। इस कार्यक्रम के मंच और आधिकारिक बोर्ड का प्रमुख रंग नीला हुआ करता था, जो लंबे समय तक इसकी पहचान बना रहा। अब नई सरकार ने इस व्यवस्था का नाम बदलकर 'राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम' कर दिया है। इसके साथ ही कार्यक्रम के बोर्ड और उसकी डिजाइन में भी बदलाव किया गया है, जिसमें प्रमुख रंग भगवा रखा गया है।


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि प्रत्येक महीने के दूसरे मंगलवार को राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें मुख्यमंत्री स्वयं लोगों की समस्याएं सुनेंगे और संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश देंगे। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य आम लोगों की शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है।


भगवा रंग और भाजपा का संबंध

भगवा रंग भारतीय परंपरा में त्याग, तप, साहस और राष्ट्रसेवा का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का ध्वज भी भगवा है और भारतीय जनता पार्टी के झंडे का प्रमुख रंग भी भगवा ही है। भाजपा लंबे समय से इस रंग को अपनी वैचारिक और सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत करती रही है। भाजपा शासित कई राज्यों में सरकारी अभियानों, आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों की ब्रांडिंग में भगवा रंग के इस्तेमाल को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। समर्थकों का कहना है कि यह भारतीय सांस्कृतिक विरासत और परंपरा का प्रतीक है, जबकि विपक्ष अक्सर इसे सरकारी संस्थानों के राजनीतिक रंगकरण (Political Branding) के रूप में देखता है।


बिहार में भी दिखने लगा बदलाव

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में प्रशासनिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति में भगवा रंग की बढ़ती मौजूदगी को राजनीतिक रूप से भी देखा जा रहा है। 'जनता के दरबार में मुख्यमंत्री' की जगह 'राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम' और उसके भगवा रंग के बोर्ड को इसी बदलाव की एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है। 


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल कार्यक्रम के नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा सरकार अपनी कार्यशैली और राजनीतिक पहचान को प्रशासनिक आयोजनों में भी प्रमुखता से स्थापित करना चाहती है। हालांकि सरकार की ओर से इसे केवल नई ब्रांडिंग और जनसहभागिता को मजबूत करने की पहल बताया जा रहा है। 


क्या है राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम?

राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम मुख्यमंत्री की प्रत्यक्ष जनसुनवाई व्यवस्था है। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए लोग अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक और प्रशासनिक समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रख सकते हैं। शिकायतों को संबंधित विभागों तक तत्काल भेजा जाता है और उनके निष्पादन की निगरानी भी की जाती है। इसे सरकार ने जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का माध्यम बताया है।

अभिजीत की रिपोर्ट