बांकीपुर के मतदाता नहीं करते सेलिब्रिटी उम्मीदवार पर भरोसा, सीएम बनने का सपना पालने वाली का हुआ था जमानत जब्त, अब मुश्किल में प्रशांत किशोर
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में द प्लुरल्स पार्टी की संस्थापक पुष्पम प्रिया चौधरी ने पूरे बिहार में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया था। बांकीपुर में उनकी जमानत जब्त हो गई, अब पीके भी सेलिब्रिटी उम्मीदवार हैं
Bankipur Bypoll : बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर में 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव पर पूरे देश की नजर है। यह सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि भाजपा और जन सुराज के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। एक ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की राजनीतिक विरासत दांव पर है, तो दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता की परीक्षा दे रहे हैं। बांकीपुर सीट पर उपचुनाव नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद खाली हुई है। नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक रहे और पिछले करीब 30 वर्षों से इस सीट पर भाजपा का कब्जा बना हुआ है। ऐसे में भाजपा के लिए यह सीट बचाना प्रतिष्ठा का प्रश्न है।
वहीं, प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी रणनीति ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद भी उन्होंने कई राज्यों के चुनावों में अपनी रणनीतिक सफलता का दावा किया। लेकिन अब पहली बार उन्हें अपनी राजनीतिक ताकत मतपेटी में साबित करनी है।
सेलिब्रिटी उम्मीदवार को किया खारिज
प्रशांत किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बांकीपुर का चुनावी इतिहास है। इस सीट के मतदाताओं ने अब तक चर्चित या हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों के बजाय मजबूत स्थानीय राजनीतिक आधार वाले नेताओं पर अधिक भरोसा जताया है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में द प्लुरल्स पार्टी की संस्थापक पुष्पम प्रिया चौधरी ने पूरे बिहार में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया था। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के बावजूद बांकीपुर के मतदाताओं ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। उन्हें केवल 5,189 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई। वहीं भाजपा के नितिन नवीन ने 83,068 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की। यानी सेलिब्रिटी उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी को लोगों को ख़ारिज कर दिया।
अब राजनीतिक गलियारों में तुलना प्रशांत किशोर से भी की जा रही है। वे भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित चेहरा हैं, लेकिन उनके सामने चुनौती यह है कि क्या बांकीपुर के मतदाता केवल लोकप्रियता के आधार पर उन्हें वोट देंगे या फिर स्थानीय राजनीतिक समीकरण और संगठनात्मक मजबूती निर्णायक साबित होगी।
जन सुराज के लिए चुनौती
प्रशांत किशोर के लिए चिंता की एक और वजह पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे हैं। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। पार्टी का कोई भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका। बांकीपुर में भी भाजपा के नितिन नवीन को 98,299 वोट मिले थे, जबकि जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी को केवल 7,717 वोट प्राप्त हुए थे। इससे साफ है कि पार्टी का इस सीट पर अब तक मजबूत जनाधार नहीं बन पाया है।
बांकीपुर बदलता है किस्मत
बांकीपुर विधानसभा का इतिहास बिहार की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इस सीट ने राज्य को दो मुख्यमंत्री दिए हैं। वर्ष 1962 में यहां से निर्वाचित कृष्ण बल्लभ सहाय बाद में बिहार के मुख्यमंत्री बने। 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा इसी सीट से जीतकर बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। 1977 में जनसंघ के वरिष्ठ नेता ठाकुर प्रसाद यहां से विधायक चुने गए और बाद में कर्पूरी ठाकुर सरकार में उद्योग मंत्री बने। उनकी राजनीतिक विरासत को उनके पुत्र रविशंकर प्रसाद ने राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया और वे केंद्र सरकार में कई बार मंत्री रहे। 1995 से बांकीपुर भाजपा का मजबूत गढ़ बन गया। नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने लगातार चार बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। उनके निधन के बाद 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन पहली बार विधायक बने और फिर 2010, 2015, 2020 तथा 2025 में लगातार जीत दर्ज कर इस सीट पर भाजपा की पकड़ और मजबूत कर दी।
प्रतिष्ठा की लड़ाई
इस बार का उपचुनाव केवल विधायक चुनने का चुनाव नहीं माना जा रहा है। भाजपा के लिए यह अपने सबसे मजबूत शहरी गढ़ को बचाने की चुनौती है, जबकि प्रशांत किशोर के लिए यह उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता और जनाधार की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।